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शिमला, 18 मई (हि.स.)। राजधानी शिमला में सफाई व्यवस्था का संकट लगातार गहराता जा रहा है। सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को चौथे दिन भी जारी रही। शहर के कई इलाकों में कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिससे लोगों को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। मॉल रोड, रिज, लोअर बाजार, संजौली, लक्कड़ बाजार, छोटा शिमला और टूटीकंडी समेत कई वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है।
सैहब सोसाइटी से जुड़े करीब 800 सफाई कर्मचारी 10 प्रतिशत वार्षिक वेतन बढ़ोतरी बहाल करने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि साल की शुरुआत में उनकी वेतन वृद्धि रोक दी गई थी। उनका आरोप है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन वेतन में बढ़ोतरी नहीं होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने कहा कि 12 हजार रुपये महीने में घर का खर्च चलाना संभव नहीं है।
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों से बातचीत की, लेकिन उनकी मांगों पर कोई समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के रवैये को नकारात्मक बताया है।
इधर, नगर निगम प्रशासन सफाई व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक इंतजामों में जुटा हुआ है। नगर निगम द्वारा सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स करने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, सफाई कर्मचारियों ने इस फैसले का विरोध किया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सफाई व्यवस्था को आउटसोर्स किया गया तो इसके परिणामों की जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि पहले भी इस तरह की कोशिश की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई थी।
बता दें कि प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों पर एस्मा लगाया हुआ है। इसके तहत आने वाले दिनों में कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इसके बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और हड़ताल जारी रखने की बात कह रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा