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नई दिल्ली, 18 मई (हि.स.)। भारत ब्रिक्स न्याय मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता के तहत 19-22 मई के बीच कानूनी सुधारों और विवादों के त्वरित निपटारे की दिशा में एक बड़ी पहल करेगा। इस आयोजन की शुरुआत गुजरात के गांधीनगर में ब्रिक्स के वरिष्ठ अधिकारियों और न्याय मंत्रियों की बैठक से होगी।
विधि एवं न्याय मंत्रालय के अनुसार विधि मामलों का विभाग इस बैठक की मेजबानी करेगा। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में मुख्य रूप से संस्थागत मध्यस्थता, मध्यस्थता सुधारों और वाणिज्यिक व सार्वजनिक क्षेत्र के विवादों में वैकल्पिक विवाद समाधान की भूमिका पर गहन चर्चा होगी। इसके अलावा अदालतों में लंबित मामलों को कम करने और कम लागत में समय पर न्याय दिलाने वाले सुधारों की भी समीक्षा की जाएगी।
इसके बाद 21-22 मई को ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों का महाकुंभ आयोजित होगा। इस मंत्रिस्तरीय मंच पर ब्रिक्स देशों के बीच एडीआर आधारित सहयोग बढ़ाने के लिए एक 'संयुक्त वक्तव्य' अपनाया जाएगा। इसके तहत ट्रेनिंग प्रोग्राम, आदर्श नियम और डिजिटल विवाद समाधान मंच तैयार करने जैसी ठोस प्रतिबद्धताएं तय की जाएंगी।
इस चार दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करना है। इसके तहत कई बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें ब्रिक्स देशों के बीच नीतिगत दृष्टिकोणों और संस्थागत अनुभवों को साझा करना, मध्यस्थों, न्यायाधीशों, सरकारी कानूनी अधिकारियों तथा कानूनी पेशेवरों के लिए संयुक्त कार्यशालाएं और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करना, डिजिटल तकनीक का उपयोग और कानूनी अनुसंधान करना शामिल है।
इन बैठकों में पूर्ण सत्र और द्विपक्षीय आदान-प्रदान शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य ठोस सहयोग पहल, क्षमता निर्माण परियोजनाएं और संस्थागत संबंध स्थापित करना है। इन बैठकों के परिणाम ब्रिक्स देशों के न्याय मंत्रियों द्वारा मध्यस्थता और मध्यस्थता में क्षमता निर्माण के माध्यम से वैकल्पिक विवाद समाधान को मजबूत करना विषय पर एक घोषणापत्र में संकलित किए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी