डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत का संविधान अपने मूल में एक ऐसे समाज की परिकल्पना करता है जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान अवसर प्राप्त हों और वह अपने सामर्थ्य के अनुरूप विकास कर सके। यह विचार कहना होगा कि एक संवैधानिक संकल्प है जिसे अनुच्छेद 14, 21क और अन्य
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