मोहन सरकार का संवेदना से सशक्तिकरण तक का निर्णय है दिव्यांग शिक्षा में मानदेय वृद्धि
- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
समाज की वास्तविक प्रगति का मापदंड इस बात से तय होता है कि वह अपने सबसे कमजोर वर्गों के प्रति कितना संवेदनशील है। ‘दिव्यांगजन’ वे लोग हैं, जो जन्म से या जीवन की किसी दुर्घटना के कारण शारीरिक या मानसिक सीमाओं से जूझते हैं, परंत
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