भगवान् परशुरामः अन्याय,अत्याचार एवं दमनकारी वृत्तियों के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक
-डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा
त्रैता युग में जब परात्पर ब्रह्म के श्रीराम रुप में अवतरित होने पर संपूर्ण सृष्टि अलौकिक आनन्द वैभव से ओतप्रोत थी, और सब तरफ सात्विक भावों की प्रधानता थी, किंतु तब ऐसे ऊर्जा वान स्वर्णिम समय में भी मदोन्मत्त क्षत्रिय सत्ता
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