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-रवि पाराशर
दिल्ली का विज्ञान भवन, भारती-भारतीय नारी को नारायणी के स्तर तक ले जाने वाले उपायों पर 7 और 8 मार्च को महा-मंथन के लिए तैयार है। नारी से नारायणी विषय पर भारत की महिला विचारकों का सम्मेलन देश में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। अपनी तरह के इस अनूठे राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारतीय विद्वत परिषद, राष्ट्र सेविका समिति और उसका संगठन शरण्या मिल कर कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सम्मेलन में विशेष अतिथि होंगी।
खास बात यह है कि भारती सम्मेलन में महिला सांसदों के विशेष पैनल के साथ-साथ देश की महिला वाइस चांसलरों का भी खास सत्र होगा। इसके अलावा देश की महिला संत भी साध्वी संगम में हिस्सा लेंगी। सम्मेलन का उद्देश्य नारी को परिवार निर्माण की मुख्य इकाई से आगे ले जाकर राष्ट्र निर्माण की इकाई तक विकसित करना है। इसके लिए दो दिन के राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न परिचर्चाओं से निकले सुझाव भारत सरकार के संबंधित विभागों को भेजे जाएंगे, ताकि उनके क्रियान्वयन के लिए उचित कदम उठाए जा सकें।
आयोजक संस्थाओं ने नारी से नारायणी तक की महत्वपूर्ण यात्रा के लिए 7-8 मार्च को दिल्ली में होने जा रहे मुख्य सम्मेलन से पहले देशभर में विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाया है। वहां से मिले सुझावों को मुख्य सम्मेलन में आए सुझावों के साथ रखा जाएगा। इस तरह सर्वसम्मत कार्य योजना पर काम किया जाएगा। महिला विचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य यह है कि महिलाओं को भारतीय दृष्टि से पूरे समाज के विकास की धुरी बनाया जाए।
असल में, राष्ट्र सेविका समिति वर्ष 1936 में दशहरे के दिन अपनी स्थापना के समय से ही महिलाओं के बहुआयामी उत्थान की दिशा में अग्रणी पहल कर रही है। समिति फेमिनिज्म की पश्चिमी अवधारणा को सही नहीं मानती। फेमिनिज्म या कहें, नारीवाद में पुरुषों के साथ संघर्ष कर आगे बढ़ने का भाव है, जबकि भारतीय विचार में नारियां, पुरुषों के बराबर हैं। उनमें कोई संघर्ष नहीं है। समिति का कहना है कि भारतीय नारियों के माध्यम से पूरे समाज के विकास के लिए काम करती है। सिर्फ महिलाओं के उत्थान तक उसका कार्यक्षेत्र सीमित नहीं है बल्कि वह राष्ट्र के बहुआयामी उत्थान की पक्षधर है। यही अंतर राष्ट्र सेविका समिति को दूसरे नारी अधिकारवादी संगठनों से अलग करता है।
भारती- नारी से नारायणी राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में आठ मुख्य थीमों पर चर्चा की जाएगी। ये थीम हैं- विद्या, शक्ति, मुक्ति, चेतना, प्रकृति, संस्कृति, सिद्धि और कृति। विद्या के तहत महिलाओं की उच्च शिक्षा पर बात की जाएगी। बच्चियों की ड्रॉपआउट की समस्या, उनके लिए खास पाठ्यक्रम तैयार करने और सेल्फ डिफेंस को भी अनिवार्य रूप से पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के विषय पर गहन चर्चा होगी।
इसी तरह शक्ति थीम के तहत महिलाओं के आत्म-परिचय, आत्मबोध से जुड़े तत्वों पर विचार किया जाएगा। महिलाएं आत्मनिर्भर कैसे बनें, उनमें वित्तीय साक्षरता का विकास कैसे हो और स्किल एजुकेशन उन्हें प्रभावी रूप से कैसे दी जाए, इन विषयों पर चर्चा होगी। मुक्ति थीम के अंतर्गत उन उपायों पर चर्चा की जाएगी, जिन्हें अपनाकर आम भारतीय महिलाएं आज तक चली आ रही रूढ़ियों की सीढ़ियां उतर कर उनसे बाहर सही मार्ग पर चलने लायक बन सकें, घरेलू हिंसा से मुक्त वातावरण में खुल कर जीने की स्वतंत्रता हासिल कर पाएं।
चेतना थीम के अंतर्गत महिलाओं को कार्यक्षेत्र में नीतियों और निर्णयों में बराबर की भागीदारी के लिए सक्षम बनाने के उपायों पर गहन-गंभीर चर्चा की जाएगी। प्रकृति थीम के तहत महिलाओं की शारीरिक और मानसिक प्रकृति से जुड़े मसले उनके उत्थान में बाधक न बनें, इसके लिए उपायों पर खास चर्चा की जाएगी। महिला श्रमिकों के लिए किस तरह के इंतजाम कार्य स्थलों पर अनिवार्य रूप से होने चाहिए, इस पर विचार किया जाएगा। कामकाजी महिलाएं पीरियड, मातृत्व, शिशु-पालन और मीनोपॉज जैसी स्थितियों से भी सम्मान के साथ जीवन-यापन कर सकें, इन विषयों पर भी चर्चा कर सुझाव सरकार को सौंपे जाएंगे।
सिद्धि थीम के अंतर्गत सफल महिलाओं की वास्तविक कहानियों पर चर्चा होगी। कृति थीम के तहत इस बात की चर्चा की जाएगी कि महिलाओं में नारी से नारायणी तक की यात्रा में सकारात्मक परिवर्तन लाने की कार्य-योजना किस तरह लागू की जाए। सम्मेलन में शिक्षा, कला, संस्कृति, समाज सेवा, राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा, चिकित्सा, उद्योग, उद्यमिता, वित्त, न्यायपालिका, अध्यात्म, खेल, पत्रतारिता, मीडिया, साहित्य और दूसरे सभी क्षेत्रों में काम कर रही महिलाएं शामिल हो रही हैं।
इसलिए उम्मीद यही है कि दो दिन का महिला विचारकों का भारती- नारी से नारायणी राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र सरकार को महिलाओं के उत्थान से जुड़े बहुआयामी सकारात्मक सुझाव देने में सफल सिद्ध होगा। सम्मेलन सफल अवश्य होगा क्योंकि इसके आयोजकों में भारत में 90 वर्षों से काम कर रहा राष्ट्र सेविका समिति भी शामिल है। समिति को प्रचार से दूर रहते हुए देश में महिलाओं के विकास के लिए हरसंभव कार्य करने का अच्छा अनुभव है। सबसे अच्छी बात यह है कि राष्ट्र सेविका समिति के विचार विशुद्ध भारतीयता से जुड़े हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश