खून, खामोशी और खतरनाक मंसूबों का खेल
प्रणय विक्रम सिंह यह दौर सिर्फ युद्ध का नहीं बल्कि वैश्विक पाखंड के बेनकाब होने का है। समय दुआओं का है लेकिन दुनिया बारूद और खामोशी के साये में खड़ी है। रमजान का महीना है। वो महीना, जिसमें रोज़े रखे जाते हैं, दुआएं मांगी जाती हैं, इफ़्तार की थालिय

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