समान नागरिक संहिता पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के निहितार्थ
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत एक बहुधर्मी, बहुसांस्कृतिक और विविधताओं से भरा राष्ट्र है। यहाँ विभिन्न धर्मों, परंपराओं और सामाजिक व्यवस्थाओं के कारण व्यक्तिगत जीवन से जुड़े कई कानून अलग-अलग रूप में लागू होते रहे हैं। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना औ
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