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भराड़ीसैंण, 11 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध और बहिर्गमन कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रदेश की समस्याओं को लेकर उनकी पीड़ा का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सत्रावधि कम से कम 21 दिन और तीन सोमवार शामिल करने की मांग की थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया। यह विधानसभा का 10 वां सत्र है और मुख्यमंत्री के पास 40 विभाग हैं। यदि मुख्यमंत्री स्वयं सदन में उपस्थित रहते तो अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न सीधे उनसे पूछे जा सकते थे।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण निर्णय मंत्रिमंडल और विचलन (डिविएशन) के माध्यम से लिए गए हैं, जो चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि पिटकुल पिसी ध्यानी के पास इंजीनियरिंग की डिग्री नहीं होने के बावजूद उन्हें पिटकुल जैसे महत्वपूर्ण विभाग का प्रबंध निदेशक बनाया गया। 26 फरवरी को उच्च न्यायालय की ओर से उन्हें हटाने के संबंध में नोटिस जारी किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पद के लिए आयु सीमा में बदलाव किया गया। ऐसे निर्णयों को मुख्यमंत्री से जानकारी लेने की इक्छा थी लेकिन सदन में मुख्यमंत्री उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने जॉर्ज एवरेस्ट की भूमि 15 वर्ष की लीज पर सरकार ने एक कंपनी को दिया है। यह भूमि विकसित करने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक से लगभग 23 करोड़ का लोन लिया था। यह पैसा जमीन को सुंदर, उपयोगी और पर्यटन-योग्य बनाने में खर्च किया गया। इसके बाद यह भूमि 15 साल की लीज पर एक निजी कंपनी को दी गई।उन्होंने डाकपत्थर की बहुमूल्य भूमि आवंटन पर भी सवाल उठाए और कहा कि संबंधित उपक्रमों से विधिवत अनुमति नहीं ली गई।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि एक ही अधिकारी ऊर्जा विभाग और यूआईडीबी से जुड़े पदों पर रहते हुए जमीन के आवंटन और हस्तांतरण से जुड़े निर्णयों में भूमिका निभा रहा है, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने पूछा कि जल विद्युत परियोजनाओं के लिए भूमि कहां से आएगी, जबकि भूमि देने वाले किसान धरने पर बैठे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में कोई नया विजन नहीं है और पुराने बिंदुओं को जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल कॉलेजों की स्थिति, मानव विकास सूचकांक, ‘हर घर जल’ योजना, नकल विरोधी कानून के बावजूद परीक्षा में गड़बड़ियों और ‘लखपति दीदी’ योजना पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को 2047 तक विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य तो घोषित किया गया है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट रोडमैप दिखाई नहीं देता। अंत में उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण का पुरजोर विरोध दर्ज कराया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय