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नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने विधानसभा में दिए अपने विस्तृत वक्तव्य में दिल्ली में प्रदूषण के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से लेकर वर्तमान सरकार की कार्ययोजना तक का तथ्यात्मक विवरण सदन के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984–85 में एमसी मेहता बनाम भारत सरकार मामले से लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीएनजी आदेश, औद्योगिक रिलोकेशन और वाहन प्रदूषण मानकों तक कई निर्णायक फैसले लिए गए, लेकिन 2014 के बाद दिल्ली की स्थिति लगातार बदतर होती गई।
मंत्री ने कहा कि 2014 से 2025 तक दिल्ली को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और आईयूएयर जैसी संस्थाओं ने लगातार दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी के रूप में चिन्हित किया, जो आम आदमी पार्टी (आआपा) सरकार की पूर्ण विफलता को दर्शाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और एनजीटी की कई कड़ी टिप्पणियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतों ने बार-बार दिल्ली को “गैस चैंबर” और “रहने लायक़ नहीं” तक कहा, फिर भी तत्कालीन सरकार ने ठोस सुधार नहीं किए।
सिरसा ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि ऑड-ईवन योजना असफल रही, पीयूसी व्यवस्था कमजोर रही और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम तक निर्धारित गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं लगाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के पैसों से स्मॉग टावर, ऑड-ईवन और अन्य अभियानों पर भारी प्रचार किया गया, लेकिन जमीनी परिणाम शून्य रहे।
इसके विपरीत मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में मौजूदा सरकार ने आते ही प्रदूषण के विरुद्ध “एक्शन मोड” अपनाया। तीनों लैंडफिल साइट्स - ओखला, भलस्वा और गाजीपुर- पर बायोमाइनिंग के ज़रिये हर महीने हजारों मीट्रिक टन कूड़ा हटाया जा रहा है और 45 एकड़ ज़मीन पुनः प्राप्त की जा चुकी है। एमसीडी को सॉलिड वेस्ट प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता दी गई है। डस्ट मिटिगेशन के लिए सड़कों की एंड-टू-एंड कार्पेटिंग, एंटी-स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर, मैकेनिकल रोड स्वीपर्स और सख्त रोड कटिंग नीति लागू की गई है। निर्माण स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, भारी जुर्माने और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है।
वाहन प्रदूषण के मोर्चे पर मंत्री ने बताया कि ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नीति लागू की गई है, फर्जी पीयूसी केंद्र बंद किए गए हैं और इलेक्ट्रिक बसों का देश का सबसे बड़ा बेड़ा तैयार किया जा रहा है। 2026 तक 7500 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरेंगी, जिससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी।
हरित दिल्ली के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, 1994 के बाद पहली बार 10,000 एकड़ से अधिक भूमि को रिज़र्व फॉरेस्ट घोषित किया गया है। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत लाखों पौधे लगाए गए हैं और आने वाले समय में नए शहरी जंगल विकसित किए जा रहे हैं। संस्थागत सुधारों के तहत विशेषज्ञ समितियों का गठन, डीपीसीसी में लंबित भर्तियों की पूर्ति और आधुनिक तकनीकी समाधानों को अपनाया गया है। मंत्री ने बताया कि इन ठोस कदमों का असर एयर क्वालिटी इंडेक्स और ‘सैटिस्फैक्टरी डेज़’ की संख्या में स्पष्ट सुधार के रूप में दिख रहा है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि निर्णायक और दीर्घकालिक समाधान लागू कर रही है। उन्होंने दोहराया कि दिल्ली अब रुकेगी नहीं बल्कि समन्वय और ठोस नीति के साथ स्वच्छ हवा की ओर तेज़ी से आगे बढ़ेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव