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मऊ, 09 जनवरी (हि.स.)। जनपद के प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) वीबी- जी राम जी को लेकर शुक्रवार काे एक प्रेस वार्ता की। उन्होंने मनरेगा की संरचनात्मक और कार्यात्मक संबंधी विफलताओं की चर्चा करते हुए कहा कि नए अधिनियम में बेहतर बदलाव किए गए हैं। पूर्व में संचालित मनरेगा योजना में खराब गुणवत्ता और अनियमित परिसंपत्ति निर्माण, गहरा भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता, नकली और डुप्लीकेट जॉब कार्ड, फर्जी लाभार्थी, कमजोर निगरानी और सामाजिक जवाब देही, प्रशासनिक क्षमता की बाधाएं आदि के चलते वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा बेहतर अधिनियम का निर्माण किया गया है।
वी बी जी राम जी अधिनियम 2025 का मुख्य उद्देश्य सुनिश्चित और बेहतर आजीविका सुरक्षा देना, टिकाऊ, उच्च गुणवत्ता वाले का ग्रामीण संपत्तियां सृजित करना, तकनीक आधारित पारदर्शिता के माध्यम से भ्रष्टाचार समाप्त करना, जवाब देही के साथ सहकारी संघवाद मजबूत करना तथा गांव स्तरीय योजना को राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा प्राथमिकताओं के साथ एकीकृत करना है। इसके अलावा ग्रामीण रोजगार नीति को विकसित भारत 2047 रोड मैप के अनुरूप भी बनाना है।
प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने वी बी जी राम जी अधिनियम 2025 की ढांचे एवं उसके प्रमुख प्रावधानों का भी मीडिया के साथ जानकारी साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले मनरेगा योजना का मुख्य कार्य केवल रोजगार प्रदान करने पर फोकस करना था जबकि वर्तमान अधिनियम में रोजगार को गांव विकास और विकसित भारत 2047 के दृष्टि से जोड़ना है। पिछली मनरेगा योजना के तहत 100 दिनों के कार्य की गारंटी थी परंतु नए अधिनियम में 125 दिनों के कार्य की गारंटी है। पिछली मनरेगा योजना में केंद्र श्रम लागत और सामग्री का 75% अनुदान करता था, वर्तमान अधिनियम में केंद्र राज्य की साझेदारी 60: 40 की रखी गई है। पूर्व की योजना में केवल स्थानीय स्तर पर योजना बद्ध एवं कम समन्वय के साथ कार्य होता था परंतु वर्तमान अधिनियम के तहत गांव स्तर परियोजनाएं पहले तैयार फिर ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल मानचित्र और प्रधानमंत्री की गति शक्ति से संयोजित करना है। उन्होंने कहा कि नए अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से छमाही सामाजिक ऑडिट का प्रावधान है तथा निश्चित समय सीमाओं और जिला लोकपालों के साथ डिजिटल बहु स्तरीय शिकायत प्रणाली की भी व्यवस्था की गई है। उसके प्रशासनिक व्यय को भी पूर्व के छह प्रतिशत से बढ़कर अब 9% तक कर दिया गया है जिससे बेहतर स्टाफिंग, प्रशिक्षण पारिश्रमिक और तकनीकी क्षमता की अनुमति मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / वेद नारायण मिश्र