Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जयपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान पुलिस द्वारा आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन 2026 का समापन विकसित भारत के विजन को साकार करने के संकल्प के साथ हुआ। जयपुर में आयोजित इस सम्मेलन के अंतिम दिन आधुनिक अपराधों से निपटने, नई तकनीकों के समावेश और नवाचार की रणनीतियों पर गहन मंथन किया गया।
मुख्य अतिथि मुख्य सचिव वी श्रीनिवास थे, जिन्होंने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पुलिसिंग इन विकसित भारत विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए पुलिस अधिकारियों को प्रोत्साहित किया । उन्होंने अपने दीर्घकालीन कार्य अनुभव के आधार पर विकसित भारत के योग्य पुलिस के लिए किए जाने वाले कार्यो, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, डॉक्यूमेंटेशन आदि विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने सम्मेलन के सफल निष्पादन की जानकारी साझा करते हुए भविष्य की पुलिसिंग का रोडमैप पेश किया। शर्मा ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय पुलिस सम्मेलन के तहत विभिन्न सत्रों में दिए गए प्रशिक्षण की जानकारी दी और इससे विकसित भारत के परिपेक्ष में पुलिसिंग में आने वाले परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर सावंत डीजी ट्रेनिंग अनिल पालीवाल, आरपीए निदेशक संजीव कुमार नार्जरी आदि मंचासीन थे। आभार आरपीए के अतिरिक्त निदेशक शंकरदत्त शर्मा ने जताया।
सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय से हुई। दिल्ली पुलिस के विशिष्ट पुलिस आयुक्त अजय चौधरी ने अपने व्याख्यान में इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक युग में तकनीक ही महिलाओं के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। उन्होंने पुलिसिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे तकनीक के माध्यम से अपराध होने से पहले ही उसे रोका जा सकता है।
कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उत्तर प्रदेश के आईपीएस श्री वैभव कृष्ण ने पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण की आवश्यकता जताई। उन्होंने बताया कि आज के दौर में जन आंदोलनों का स्वरूप बदल रहा है, ऐसे में पुलिस को केवल बल प्रयोग के बजाय एक व्यापक रणनीति और तकनीकी डेटा के आधार पर आंदोलनों का प्रबंधन करना चाहिए। न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एनएफएसयू भोपाल के निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने फॉरेंसिक क्षमताओं को अपडेट करने पर बल दिया। उन्होंने त्वरित अनुसंधान के लिए अत्याधुनिक लैब और एनसीएल के नियमों की कड़ाई से पालना को अनिवार्य बताया। चर्चा का मुख्य केंद्र यह रहा कि कैसे फॉरेंसिक साक्ष्य अपराधी को सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राजस्थान एटीएस और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के आईजी विकास कुमार ने ड्रग्स की समस्या को देश की युवा शक्ति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने इसके निवारण, अनुसंधान और सबसे महत्वपूर्ण पुनर्वास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल नशा तस्करों को पकड़ना काफी नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर मांग को खत्म करना भी पुलिस की जिम्मेदारी है। सम्मेलन के अंतिम सत्रों में एनडीआरएफ के आईजी एन.एस. बुन्देला ने आपदा प्रबंधन की बदलती चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वहीं आईबी की संयुक्त निदेशक सत्यप्रिया सिंह ने विदेशी हस्तक्षेप और उसके प्रतिकार जैसे गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इन सत्रों में सीमा पार से होने वाली साजिशों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पुलिस की तैयारी को परखा गया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश