प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी बड़ा कदम: प्रमुख सचिव रविकान्त
जयपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। राज्य के प्रमुख सचिव माइंस एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने कहा है कि मेजर और माइनर ब्लॉकों की आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ब्लॉकों की नीलामी में ईज ऑफ डूइंग की दिशा में राजस्थान तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रविकान्त अहमदाबाद मे
प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों की नीलामी बड़ा कदम: प्रमुख सचिव रविकान्त


जयपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। राज्य के प्रमुख सचिव माइंस एवं भूविज्ञान टी. रविकान्त ने कहा है कि मेजर और माइनर ब्लॉकों की आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ब्लॉकों की नीलामी में ईज ऑफ डूइंग की दिशा में राजस्थान तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रविकान्त अहमदाबाद में आयोजित राष्ट्रीय खनिज चिंतन शिविर के दूसरे दिन के सत्र में आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्री-एम्बेडेड ब्लॉक्स फॉर आक्शन विषय पर प्रजेटेंशन के माध्यम से राजस्थान के अनुभव और कार्ययोजना प्रस्तुत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राजस्थान में आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर 8 मेजर मिनरल ब्लॉक के ऑक्शन की प्रक्रिया जारी हैं वहीं माइनर मिनरल के 62 ब्लॉक और मेजर के 5 ब्लॉक चिन्हित किए गए हैं।

राजस्थान के प्रमुख सचिव माइंस टी. रविकान्त ने कहा कि ऑक्शन खानों के परिचालन में लाने में देरी देशव्यापी समस्या है। आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करने में देरी के चलते नीलाम खानों में खनन कार्य आरंभ नहीं हो पाता, जिससे निवेश, उत्पादन, रोजगार और सरकारी राजस्व प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि 2020 में इन्ही कारणों से केन्द्र सरकार ने सभी राज्यों को कम से कम 5 प्री-एम्बेडेड ब्लॉक ऑक्शन करने का लक्ष्य दिया। गुजरात ने एक और राजस्थान ने 8 मेजर मिनरल प्री-एम्बेडेड ब्लॉक आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ऑक्शन की प्रक्रिया आरंभ की।

रविकान्त ने कहा कि प्री-एम्बेडे़ड ब्लॉकों को भी नीलामी के स्तर तक लाने में आने वाली चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि जनसुनवाई में ही नोटिस प्रकाशन से मिनिट्स जारी होने तक दो माह तक का समय लग जाता है। आईबीएम से माइनिंग प्लान स्वीकृति के समय को भी कम किया जा सकता है। इसी तरह से सेक और सीया से बेहतर आपसी समन्वय के अभाव के कारण अनावश्यक समय लग जाता है। वन एवं वन्यजीव विभाग से अनुमतियों में अधिक समय लग जाता है। इस सबके बाद मिनरल की रिजर्व प्राइस तय करने वाला समय भी एक कारण हो जाता है।

उन्होंने कहा कि इन कार्यों में लगने वाला समय कम हो सके इस तरह की व्यवस्था सुनिश्चित होना समय की आवश्यकता है। इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारों दोनों को ही समन्वित प्रयास करने होंगे। प्रक्रिया को आसान और समझ विकसित करनी होगी। उन्होंने बताया कि नीलाम खानों में खनन कार्य शुरु करने के लिए करीब 20 अनुमतियां प्राप्त करनी होती है। यह पहला अनुभव होने और परस्पर समन्वय के बेहतर प्रयासों के बावजूद समय लगा पर इस समय को कम किया जा सकता है। रविकान्त ने कहा कि खानों को जल्द परिचालन में लाना समय की मांग है और इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने होंगे। उन्होंने बंशीपहाड़पुर में प्री-एम्बेडेड ब्लॉकों के सफल ऑक्शन की चर्चा भी की।

तीन दिवसीय चिंतन शिविर में सभी राज्य हिस्सा ले रहे हैं। राजस्थान से अतिरिक्त निदेशक भूविज्ञान आलोक प्रकाश जैन, भूवैज्ञानिक सीपी दाधीच, सुशील कुमार हुड्डा अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश