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कोलकाता, 09 जनवरी (हि.स.)। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर एक साथ की गई छापेमारी को लेकर कांग्रेस के भीतर ही मतभेद उभरकर सामने आए हैं। इस मामले में पार्टी के राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर के नेताओं की प्रतिक्रियाएं एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने छापेमारी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) राजनीतिक सलाहकारों पर कार्रवाई कर रहा है, क्योंकि वह तथ्यों, सच्चाई और विश्वसनीयता से जुड़ी बातों पर कार्रवाई करने में विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोलकाता में की गई यह कार्रवाई सत्तारूढ़ दल (भाजपा) की दबाव की राजनीति का एक और उदाहरण है और जब लोकतंत्र असुविधाजनक हो जाता है, तब एजेंसियों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि, अभिषेक मनु सिंघवी इससे पहले कई अहम मामलों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार का पक्ष रख चुके हैं।
वहीं, पश्चिम बंगाल कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पांच बार के पूर्व लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी ने इस मामले में बिल्कुल अलग रुख अपनाया है। उन्होंने छापेमारी को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी को लेकर इतनी चिंता क्यों हो रही है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि इसके पीछे जरूर कोई रहस्य छिपा हुआ है।
इससे पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भी इसी तरह का सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के आवास और आई-पैक के कार्यालय पहुंचीं और वहां से कुछ फाइलें तथा इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज लेकर वापस आ गईं। उन्होंने सवाल किया कि एक निजी संस्था के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री इतनी चिंतित क्यों हैं।
गौरतलब है कि, आई-पैक वर्ष 2020 से तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने का काम कर रही है।-------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर