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नई दिल्ली, 09 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल (आईएफएसओ) यूनिट ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की जा रही एक संगठित साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एक प्राइवेट बैंक के दो अधिकारियों सहित कुल पांच आरोपिताें को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने जाली दस्तावेजों पर फर्जी खाते खुलवाकर साइबर अपराध की रकम को अवैध रूप से इधर-उधर करने में मदद की।
आईएफएसओ के उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि यह गिरोह बैंक कर्मचारियों की सक्रिय मिलीभगत से काम कर रहा था। गिरफ्तार आरोपिताें में हरियाणा के हिसार निवासी प्रदीप कुमार (40) और नामनदीप मलिक (23), ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी शशिकांत पटनायक (36) के अलावा प्राइवेट बैंक की तिलक नगर शाखा के निलेश कुमार (सीनियर सेल्स मैनेजर) और चंदन कुमार (सेल्स ऑफिसर) शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत से हुई। पीड़ित को व्हाट्सऐप कॉल के जरिए खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताने वाले ठगों ने संपर्क किया। आरोपिताें ने झूठा दावा किया कि उनके मोबाइल नंबर और आधार का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है और वह जांच के दायरे में हैं। डर पैदा करने के लिए पीड़ित और उनकी पत्नी को सात दिनों तक व्हाट्सऐप वीडियो कॉल पर ‘निगरानी’ में रखा गया और घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी गई। आरोपिताें ने फर्जी सीबीआई कार्यालय का सेटअप दिखाया और एक व्यक्ति को वकील बनाकर पेश किया, जिससे मानसिक दबाव और बढ़ गया। लगातार धमकियों के बीच पीड़ित से फिक्स डिपॉजिट तुड़वाए गए, जीवनभर की बचत ट्रांसफर कराई गई और यहां तक कि गोल्ड लोन भी दिलवाया गया। ठगों ने यह कहकर रकम मंगवाई कि ‘आरबीआई के निर्देश पर सत्यापन’ के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। इस तरह कुल 96 लाख रुपये की ठगी की गई। इस मामले में चार नवंबर 2025 को स्पेशल सेल, आईएफएसओ थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज की गई थी। तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल फुटप्रिंट और जमीनी सूचना के आधार पर पुलिस ने आरोपिताें की पहचान की। जांच में सामने आया कि यस बैंक के दोनों अधिकारियों ने जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी करंट अकाउंट खुलवाया, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम को घुमाने और निकालने में किया गया।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर, संगठित और अंतरराज्यीय है। अन्य साजिशकर्ताओं, पूरे मनी ट्रेल और सहायक लोगों की भूमिका की जांच जारी है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर ठगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी