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जयपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। कोविड-19 महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने की अवधि में संचालित राज्य मिड डे मील योजना में करीब 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने प्राथमिक व विस्तृत जांच के बाद कॉनफैड के अधिकारियों और निजी फर्मों सहित 21 नामजद आरोपितोंं के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
एसीबी पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि एसीबी की जांच में सामने आया कि विद्यार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कॉनफैड के माध्यम से दाल, तेल और मसालों से युक्त कॉम्बो पैक की आपूर्ति की गई। इन्हें एफएसएसएआई व एगमार्क मानकों के अनुरूप बताते हुए स्कूलों तक डोर-स्टेप डिलीवरी का दावा किया गया, लेकिन योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं पाई गईं।
जांच में खुलासा हुआ कि योजना से जुड़े अधिकारियों और कॉनफैड के अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत कर नियमों में बदलाव किए। इससे योग्य फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर चहेती फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। बाद में इन फर्मों ने अवैध रूप से कार्य सबलेट कर फर्जी आपूर्तिकर्ताओं व ट्रांसपोर्टरों का नेटवर्क खड़ा किया।
एसीबी के अनुसार कई मामलों में वास्तविक आपूर्ति किए बिना ही अधिक दरों के फर्जी बिल पेश कर सरकारी भुगतान उठा लिया गया। इस सुनियोजित धोखाधड़ी और कूटरचना से राज्य राजकोष को लगभग 2000 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान पहुंचा।
प्रकरण में कॉनफैड के सहायक लेखाधिकारी, प्रबंधक, सहायक प्रबंधक, गोदाम कीपर, सुपरवाइजर, केन्द्रीय भण्डार के क्षेत्रीय व उप प्रबंधक, साथ ही तिरूपति सप्लायर्स, जागृत एंटरप्राइजेज, एमटी एंटरप्राइजेज, साई ट्रेडिंग सहित अन्य निजी संस्थाओं के प्रोपराइटर नामजद किए गए हैं।
एसीबी ने बताया कि आरोपितों की भूमिका, वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की कूटरचना और सरकारी धन के दुरुपयोग की गहन जांच जारी है। साक्ष्य संकलन और रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश