ग्वालियरः जिला प्रशासन की मानवीय पहल, कलेक्ट्रेट में विश्राम कक्ष सह मातृ शिशु देखभाल केन्द्र शुरू
- कलेक्टर ने नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ किया केन्द्र का शुभारंभ ग्वालियर, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर कलेक्ट्रेट परिसर में बच्चों और माताओं की सुविधा के लिए विश्राम कक्ष सह मातृ–शिशु देखभाल केंद्र का निर्माण कराया गया है। यह केंद्र व
कलेक्टर ने नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ किया केन्द्र का शुभारंभ


- कलेक्टर ने नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ किया केन्द्र का शुभारंभ

ग्वालियर, 08 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर कलेक्ट्रेट परिसर में बच्चों और माताओं की सुविधा के लिए विश्राम कक्ष सह मातृ–शिशु देखभाल केंद्र का निर्माण कराया गया है। यह केंद्र विशेष रूप से उन माताओं और छोटे बच्चों के लिए स्थापित किया गया है, जो विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए कलेक्ट्रेट आते हैं और अपने कार्य के लिये कुछ समय व्यतीत करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप संवेदनशील प्रशासन की दिशा में ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने यह पहल की है। गुरुवार को कलेक्टर रुचिका चौहान ने नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ इस केन्द्र का शुभारंभ किया। इस मौके पर कलेक्ट्रेट कार्यालय में कार्य करने वाली महिला अधिकारियों के साथ-साथ कलेक्ट्रेट में अपने कार्य से आईं महिलायें और बच्चे भी शामिल हुए। शुभारंभ के अवसर पर ही बच्चों ने कक्ष में स्थापित किए गए खिलौनों का भी आनंद लिया।

इस नवाचार के अंतर्गत माताओं को अपने शिशुओं के पोषण, देखभाल एवं पालन के लिए सुरक्षित, स्वच्छ एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराया गया है। केंद्र में माताओं के बैठने एवं विश्राम की व्यवस्था के साथ-साथ बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान, स्वच्छता, पीने का पानी एवं आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि कलेक्ट्रेट में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों के साथ आती हैं। ऐसे में माताओं को शिशु को स्तनपान कराने, उसकी देखभाल करने या कुछ समय विश्राम करने में कठिनाई होती थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह शासन विश्राम कक्ष एवं मातृ–शिशु केंद्र विकसित किया गया है। इस केन्द्र में महिलाओं और बच्चों की देखभाल के लिये केन्द्र प्रभारी भी तैनात किया जायेगा। साथ ही बच्चों के मनोरंजन के लिये टीवी भी स्थापित किया जायेगा। कलेक्ट्रेट परिसर में इस केंद्र के प्रारंभ होने से विशेषकर महिलाएं, स्वयं को अधिक सहज और सुरक्षित अनुभव करेंगी। जिला प्रशासन की यह पहल सामाजिक सरोकार और मानव केंद्रित प्रशासन का उदाहरण मानी जा रही है।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर