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कोलकाता, 05 जनवरी (हि.स.)।
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान हाशिए पर रहने वाले समुदायों को मतदान अधिकार से वंचित न होने देने के लिए निर्वाचन आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के चुनिंदा जिलों में 160 विशेष विकेंद्रीकृत सुनवाई केंद्र स्थापित करने का फैसला किया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार ये 160 केंद्र दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, झाड़ग्राम, पुरुलिया, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, नदिया, पश्चिम बर्दवान, हावड़ा और उत्तर 24 परगना जिलों में खोले जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर दक्षिण 24 परगना के तटीय इलाकों में भी ऐसे कुछ केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि इन जिलों के जिला मजिस्ट्रेट, जो जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं, उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे विशेष केंद्र खोलने का प्रस्ताव मुख्य निर्वाचन अधिकारी के माध्यम से निर्वाचन आयोग को भेजा था। मांग की वैधता को देखते हुए आयोग ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार एसआईआर की शुरुआत से ही निर्वाचन आयोग इस बात को लेकर संवेदनशील रहा है कि हाशिए के समुदायों के लोगों को प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण मतदाता सूची से बाहर न किया जाए। इसी वजह से समय-समय पर उनके लिए विशेष छूट दी गई है। 160 सुनवाई केंद्र खोलने का निर्णय इसी दिशा में ताजा कदम माना जा रहा है।
ये केंद्र अस्थायी सुनवाई शिविर के रूप में दूरदराज के इलाकों में एक या कुछ दिनों के लिए लगाए जाएंगे। इन शिविरों में निर्वाचन अधिकारी खुद मौके पर पहुंचकर लोगों की सुनवाई करेंगे, ताकि उन्हें मुख्यालय तक आने में परेशानी न हो।
इससे पहले आयोग ने यौनकर्मियों, ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों और संन्यासियों के लिए भी पहचान संबंधी दस्तावेजों के मामले में विशेष छूट का ऐलान किया था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन वर्गों के मामलों में पहचान दस्तावेजों की सख्ती आम मतदाताओं की तरह नहीं बरती जाएगी, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान अधिकार से वंचित न रह जाए।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर