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अंग्रेजी हुकुमत में ज्वार की खरीद फरोख्त कर मालगाड़ी से होता था निर्यात
देश के तमाम राज्यों के साथ विदेशों में भी सफेद ज्वार ने बनाई थी पहुंच
हमीरपुर, 05 जनवरी (हि.सं.)। उत्तर प्रदेश में हमीरपुर जिले के बुंदेलखंड की सफेदा ज्वार का रकबा घटने से इसकी मांग बढ़ने से कीमतों में गजब को उछाल आया है मौजूदा समय में यह सफेदा ज्वार पांच हजार प्रति कुंतल से लेकर छह हजार रुपए तक बिक रही है।
कालांतर में सफेदा ज्वार बुंदेलखंड में खरीफ की प्रमुख फसलों में शुमार थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। किसानों का माेह इससे भंग हुआ है और इसकी जगह पर धान एवं तिल की फसलों को किसान तवज्जो दे रहे हैं। यही कारण है कि जनपद में इसका रकबा बेहद कम रह गया है। सरीला ब्लॉक के कुछ हिस्से में इस उत्पादन का आज भी बरकरार है। बाकी सुमेरपुर, कुरारा, मौदहा, मुस्कुरा, राठ, गोहाण्ड में इसका क्षेत्रफल बहुत कम हो गया है प्रतिवर्ष रकबा घटने से इसकी मांग में इजाफा हो रहा है। इस वर्ष सफेदा ज्वार का अधिकतम खुदरा मूल्य पांच हजार से लेकर छह हजार रुपए प्रति कुंतल है। रकबा घटने से इस वर्ष सफेदा ज्वार मंडी में दिसंबर के बजाय जनवरी में आना शुरू हुई है वह भी गैर जनपदों से यहां लाकर बेची जाती है। कस्बे की गल्ला मंडी एशिया में सफेदा ज्वार की सबसे पुरानी मंडी है यहां की सफेदा ज्वार देश के सभी प्रांतों में जाती है। इसके अलावा कई मुस्लिम देशों में इसको भेजा जाता है। गल्ला मंडी के व्यापारी कुंज बिहारी पांडे, विपिन कुमार, अभिषेक शिवहरे, रमाकांत गुप्ता, राघवेंद्र पांडे, उदित नारायण तिवारी, संतोष गुप्ता, राजू गुप्ता आदि ने बताया कि जिले में सफेदा ज्वार का उत्पादन नगण्य हो गया है। इस वर्ष सफेदा ज्वार बांदा, चित्रकूट, छतरपुर, कबरई, महोबा से यहां लाकर बेची जा रही है।
व्यापारियों ने बताया कि मौजूदा समय में जसपुरा, पैलानी, बबेरू, अतर्रा, करतल, बदौसा, फतेहगंज, कर्वी, मानिकपुर, मऊ, लौंडी, गौरिहार, श्रीनगर आदि जगहों में सफेद ज्वार मंडी में आना शुरू हुई है। मंडी के व्यापारियों ने बताया कि सफेद ज्वार की सर्वाधिक मांग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान से होती है। इसके अलावा सऊदी अरब, अफगानिस्तान, कुवैत, यमन, दुबई, ओमान, ईरान, ईराक, केन्या, तंजानिया आदि देशों में भी जाती है। व्यापारियों के अनुसार सफेदा ज्वार का ज्यादातर प्रयोग पशुचारे के रूप में किया जाता है। कस्बे की गल्ला मंडी में सफेदा ज्वार की खरीद फरोख्त के लिए पूरे देश में अंग्रेजी शासन के समय से मशहूर है। अंग्रेजों के जमाने से यहां से ज्वार और सनई मालगाड़ी के माध्यम से बाहर ले जाया जाता था।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा