शिक्षा बजट में समाज-विज्ञानों पर ध्यान देने की जरूरत
- गिरीश्वर मिश्र
अंग्रेज़ों से स्वतंत्रता मिलने के समय भारत को एक पिछड़ा और तीसरी दुनिया का देश मान कर उसके लिए ‘विकास‘ को जरूरी कदम ठहराया गया। इस क्रम में विकास को पश्चिमी देशों की स्थिति के अनुसार पहचाना और परिभाषित किया गया। इसके अनुरूप विकसित
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