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सूरत, 27 जनवरी (हि.स.)। गुजरात के सूरत में मंगलवार को अखिल भारतीय बैंक हड़ताल के कारण बैंकिंग क्षेत्र के कामकाज पर व्यापक असर पड़ा है। शनिवार, रविवार और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) की छुट्टी के बाद आज एक बार फिर बैंक कर्मचारी हड़ताल पर उतर आए, जिससे अधिकांश नकद लेन-देन और चेक क्लियरिंग जैसे वित्तीय कार्य ठप हो गए हैं।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स द्वारा सप्ताह में पाँच दिन कार्य की मांग को लेकर इस हड़ताल का आह्वान किया गया है। दिसंबर माह में चौथे शनिवार (23 जनवरी) के बाद रविवार और फिर गणतंत्र दिवस की छुट्टी होने से सरकारी बैंकों का कामकाज लगातार चौथे दिन प्रभावित हुआ है।
हालांकि निजी बैंकों में वित्तीय लेन-देन सामान्य रूप से जारी रहा।
गौरतलब है कि बैंक यूनियनों और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय से सप्ताह में पाँच दिन कामकाज की मांग को लेकर विवाद चल रहा है। वर्ष 2024 में इंडियन बैंक एसोसिएशन और यूनियनों के बीच हुई 12वीं द्विपक्षीय समझौते के दौरान सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इस संबंध में सरकार द्वारा कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
यूनियनों का कहना है कि वे संतुलित कार्यप्रणाली की मांग कर रहे हैं और इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने को भी तैयार हैं। वर्तमान में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को ही बैंक बंद रहते हैं, जबकि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, एलआईसी, जीआईसी तथा केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालय सोमवार से शुक्रवार तक ही कार्यरत रहते हैं।
इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंज और मनी मार्केट जैसे क्षेत्रों में भी सप्ताह में केवल पाँच दिन ही कामकाज होता है। दो वर्षों से सरकार को औपचारिक रूप से सिफारिशें किए जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिर यूनियनों ने हड़ताल का ऐलान किया है।
दक्षिण गुजरात बैंक ऑफ बड़ौदा एम्प्लॉइज एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी डी.एम. चावड़ा ने बताया कि हमारी एकमात्र और जायज मांग यह है कि बैंकों में भी सप्ताह में केवल पाँच दिन ही कामकाज होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि जब केंद्र सरकार के अन्य विभागों, राज्य सरकारों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड और सेबी जैसी नियामक संस्थाओं में वर्षों से पाँच दिवसीय कार्यप्रणाली लागू है, तो राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों को इस सुविधा से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज की हड़ताल केवल एक चेतावनी है। यदि आने वाले दिनों में वित्त मंत्रालय ने इस विषय में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो बैंक यूनियनें और अधिक उग्र आंदोलन करेंगी। सूरत में एकत्र हुए कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी जाया जा सकता है।
फिलहाल बैंकों के बंद रहने से आम जनता और व्यापारी वर्ग को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह संघर्ष उनके अस्तित्व और न्याय के लिए है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे