Enter your Email Address to subscribe to our newsletters





अंबिकापुर, 10 जनवरी (हि.स.)। देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता और हिन्दी की सरलता व सहजता के कारण उसका व्यापक प्रसार हुआ है। हिन्दी हमारी जीवनचर्या की भाषा है। यह विचार श्री साई बाबा आदर्श स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर में शनिवार को आयोजित विश्व हिन्दी दिवस कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी आबादी द्वारा बोले जाने वाली प्रथम भाषा है। हिन्दी साहित्य में उच्चारण, लेखन और वाचन में पूर्ण साम्यता है। जो बोला जाता है वही लिखा जाता है और जो लिखा जाता है, उसी का पाठ होता है। उन्होंने हिन्दी को व्यवहार और जीवन में अपनाने पर विशेष बल दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार तिवारी ने कहा कि हिन्दी अब वैश्विक भाषा बन चुकी है। इसे वैश्विक पहचान दिलाने में संपर्क भाषा और अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मैथिली, अवधी, भोजपुरी, ब्रज, राजस्थानी, मारवाड़ी, बघेलखंडी और छत्तीसगढ़ी जैसी बोलियों से हिन्दी को मजबूती मिली है और इन्हीं बोलियों के माध्यम से हिन्दी साहित्य को समृद्ध संसार प्राप्त हुआ है।
शिक्षा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शाक्य ने कहा कि बहुभाषी होना सराहनीय है, लेकिन विदेशी भाषाओं के लिए अपनी हिन्दी को द्वितीय स्थान पर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने बच्चों में भाषा के प्रति संस्कार विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए हिन्दी के सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र दास सोनवानी ने कहा कि साहित्य संवेदना, ममता, प्रेम और मानवता का संवाहक है। कहानी, कविता और उपन्यास से रू-ब-रू होकर विद्यार्थी भारतीय संस्कृति के वाहक बनते हैं। उन्होंने हिन्दी साहित्य की चुनिंदा रचनाओं पूस की रात, टोबा टेकसिंह, काबूलीवाला, उसने कहा था, टोकरी भर मिट्टी, कफन, वापसी और चीफ की दावत के कथ्य और तथ्य से विद्यार्थियों को परिचित कराया।
सहायक प्राध्यापक कृष्णाराम चौहान ने वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. शैलेष देवांगन, डॉ. वंदना पांडेय, डॉ. जगमीत कौर, स्वाति शर्मा, संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह