116वां श्री मुलतान जोत महोत्सव 23 अगस्त को, हरिद्वार में दिखेगा होली और दिवाली का संगम
हरिद्वार, 16 अगस्त (हि.स.)। 116वां श्री मुलतान जोत महोत्सव 23 अगस्त को हरिद्वार में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर हरिद्वार नगरी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। शोभायात्रा मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था, आतिशबाजी, पुष्पवर्षा और बड़े-बड़े तोरण
पत्रकारों से वार्ता करते हुए


हरिद्वार, 16 अगस्त (हि.स.)। 116वां श्री मुलतान जोत महोत्सव 23 अगस्त को हरिद्वार में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर हरिद्वार नगरी को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। शोभायात्रा मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था, आतिशबाजी, पुष्पवर्षा और बड़े-बड़े तोरण द्वार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

श्री मुलतान जोत सभा के चेयरमैन रतनदेव चावला और अखिल भारतीय मुल्तान युवा संगठन के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नागपाल ने संयुक्त बयान में बताया कि महोत्सव में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद गंगा मैया में छोटी-छोटी पवित्र ज्योतियां प्रवाहित करेंगे। जगह-जगह हवन, सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण भी किया जाएगा। महोत्सव के दौरान गंगा जी का दुग्धाभिषेक और पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु विशेष ज्योति गंगा को अर्पित करेंगे। दूध से होली खेली जाएगी, जबकि रात में भव्य शोभायात्रा, आकर्षक रोशनी और आतिशबाजी से दिवाली जैसा दृश्य नजर आएगा। आयोजकों के अनुसार दिन में होली और रात में दिवाली का यह अनूठा संगम श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।

आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव में पूर्व राज्यपाल असम प्रो. जगदीश मुखी, भाजपा महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ, भाजपा दिल्ली प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा, सांसद बांसुरी स्वराज, उत्तराखंड सरकार के मंत्री मदन कौशिक, संजय तलवार बाबा, टीवी कलाकार अमर वाल्मीकि और अभिनेता शेख रईस करीम सहित कई विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

डॉ. नागपाल ने बताया कि श्री मुलतान जोत महोत्सव की परंपरा वर्ष 1911 में भक्त रूप चंद द्वारा शुरू की गई थी। उन्होंने पाकिस्तान के मुलतान से पैदल हरिद्वार पहुंचकर समाज में भाईचारे और शांति की कामना के साथ गंगा मैया को ज्योति अर्पित की थी। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और प्रत्येक वर्ष महोत्सव का स्वरूप भव्य होता जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही पाकिस्तान में बसे मुलतान से भी श्रद्धालु इस महोत्सव में पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण हर वर्ष इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन की महत्ता और आकर्षण बढ़ रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला