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-नई कर व्यवस्था में वैधानिक भत्तों पर आयकर छूट न मिलने को दी चुनौती, डबल बेंच ने मांगा जवाब
प्रयागराज, 21 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कार्यरत एक न्यायाधीश ने मंगलवार को नई कर व्यवस्था चुनने के बाद वैधानिक न्यायिक भत्तों पर आयकर छूट न मिलने को लेकर याचिका दाखिल की है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने जस्टिस संदीप जैन की इस याचिका पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने याचिका में हाईकोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम 1954 की धारा 22D के तहत मिलने वाले वैधानिक भत्तों की छूट को अस्वीकार किए जाने को चुनौती दी है। कहा गया है कि धारा 22 डी के तहत किराए से मुक्त आधिकारिक निवास का मूल्य या उसके बदले दिया जाने वाला मकान किराया भत्ता, वाहन सुविधाएं, सत्कार भत्ता, अवकाश यात्रा रियायत को कुल आय से आयकर मुक्त रखा गया है। याचिका में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई कर व्यवस्था के तहत आईटीआर-2 दाखिल करते समय आयकर पोर्टल ने उन्हें वैधानिक न्यायिक भत्तों के मद में 9.85 लाख रुपये की छूट का दावा करने की अनुमति नहीं दी।
केंद्र/सीबीडीटी के ज्ञापन के अनुसार नई कर व्यवस्था चुनने वाले करदाता इन छूटों का दावा नहीं कर सकते, क्योंकि यह व्यवस्था पहले से ही उदार कर स्लैब, कम कर दरों और उच्च छूट प्रदान करती है। इसमें कहा गया है कि इन लाभों के अतिरिक्त वैधानिक छूटों की अनुमति देना दोहरा लाभ देने जैसा होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे