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-मैसेज देखकर लगा स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज, 20 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को अश्लील तस्वीरों के जरिए एक युवती को कथित रूप से ब्लैकमेल करने के आरोपित की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसकी मानसिक जांच कराने का निर्देश दिया। कोर्ट ने आरोपित द्वारा भेजे गए आपत्तिजनक मैसेज और सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया वह स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति प्रतीत नहीं होता। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी को आरोपित की मानसिक जांच कराकर उसकी रिपोर्ट संबंधित जिला अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा, आरोपित द्वारा भेजे गए मैसेज और सोशल मीडिया पोस्ट का अवलोकन करने पर यह न्यायालय पाता है कि वह स्वस्थ मस्तिष्क का व्यक्ति प्रतीत नहीं होता। इसलिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कौशांबी उसकी मानसिक जांच कराकर रिपोर्ट संबंधित जिला अदालत के अभिलेख पर प्रस्तुत करें। मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1), 74, 351(2), 352 और 333, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) की धारा 3 और 4 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी) की धारा 66 ई के तहत दर्ज है।
अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपित ने किसी तरह उसका मोबाइल हैक कर उसकी अश्लील तस्वीरें हासिल की। इसके बाद वह उन तस्वीरों के आधार पर उसे लगातार ब्लैकमेल करने लगा और सोशल मीडिया के माध्यम से धमकियां भी देता रहा। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया, लेकिन जमानत पर रिहा होने के बाद उसने फिर से पीड़िता को धमकाना शुरू कर दिया। पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि पहले दोनों के बीच संबंध थे लेकिन बाद में आरोपित ने उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल किया। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मैसेज भेजकर और प्राइवेट मैसेज के माध्यम से उससे पांच लाख रुपये की मांग की।
जमानत की सुनवाई के दौरान आरोपित की ओर से कहा गया कि उसका पीड़िता के साथ प्रेम संबंध था और विवाह से इनकार करने पर उसे झूठे मामले में फंसाया गया। वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में आरोपित द्वारा पीड़िता और उसके परिजनों को भेजे गए मैसेज तथा सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें प्रस्तुत की गईं। रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपित अश्लील तस्वीरों और वीडियो के आधार पर पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था। उसने न केवल पीड़िता को अत्यंत अश्लील और अभद्र मैसेज भेजे, बल्कि सोशल मीडिया पर उसकी कई तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि संदेशों की भाषा, उनकी प्रकृति तथा सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री को ध्यान में रखते हुए आरोपित राहुल कुमार सरोज को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर मानसिक जांच कराने का आदेश दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे