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नई दिल्ली, 20 जुलाई (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के कामकाज पर चिंता जताते हुए कहा कि उन लॉ कॉलेजों को भी मान्यता दी जाती है, जो गैराज से चलते हैं। एक लॉ ग्रेजुएट के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं होने की वजह से उसे बतौर वकील रजिस्ट्रेशन नहीं करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये टिप्पणी की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने बीसीआई के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि गैराज में चलने वाले कॉलेजों को मान्यता देना बड़ी चिंता की बात है। हमें मत बताइए। आप तुरंत कोर्ट से चले जाइए, वरना आप और मुसीबत में पड़ जाएंगे।
याचिका पेशे से सीए केआर सुदर्शन ने दायर की थी। याचिकाकर्ता ने लॉ की पढ़ाई के बाद बतौर वकील रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन दायर किया था, लेकिन तमिलनाडु और पुड्डुचेरी स्टेट बार काउंसिल ने उनका आवेदन ये कहते हुए खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी और धारा 420 के तहत एक आपराधिक मामला लंबित है।
आज सुनवाई के दौरान बीसीआई और तमिलनाडु स्टेट बार काउंसिल ने जवाब दाखिल करने के लिए दो महीने का समय देने की मांग की। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता का दो हफ्ते के अंदर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन करने का आदेश दिया।--------------------------
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम