Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

हुगली, 29 जुलाई (हि. स.)। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। हुगली जिले के सप्तग्राम से तीन बार विधायक और दो बार मंत्री रह चुके वरिष्ठ नेता तपन दासगुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि वह सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे और भविष्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो सकते हैं।
तपन दासगुप्ता मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी के चार दशक पुराने राजनीतिक सहयोगियों में रहे हैं। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक ममता बनर्जी के साथ राजनीतिक सफर तय किया। तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान वह दो बार मंत्री रहे। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, हुगली जिला तृणमूल अध्यक्ष, फुरफुरा शरीफ विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष, पशुपालन विभाग तथा वेस्ट बंगाल फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभाई।
हालिया विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। इसके बाद से वह पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे थे, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कभी पार्टी के खिलाफ बयान नहीं दिया। बाद में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी असित मजूमदार को हुगली-श्रीरामपुर संगठनात्मक जिला तृणमूल अध्यक्ष बनाए जाने से उनकी नाराजगी और बढ़ गई।
तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करते हुए रविवार को तपन दासगुप्ता ने कहा कि मैं तृणमूल कांग्रेस के गठन के पहले दिन से पार्टी के साथ था और शुरुआती पांच नेताओं में मेरा नाम शामिल था। इतने वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद मुझे किनारे कर दिया गया। आज हुगली में धनियाखाली और चंडीतला को छोड़कर तृणमूल का जनाधार लगभग समाप्त हो चुका है। पार्टी बिखर गई है और जनता का विश्वास खो चुकी है। अब तृणमूल एक छोटी-सी पार्टी बनकर रह गई है। जब राजनीति व्यवसाय बन जाती है, तो किसी भी दल का यही हाल होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे। साथ ही उन्होंने भविष्य में भाजपा में शामिल होने की संभावना जताया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय