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बीरभूम, 19 जुलाई (हि. स.)। तारापीठ मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और मंदिर की व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से तारामाता सेवायत संघ ने एक अगस्त से मंदिर की नई नियमावली लागू करने की घोषणा की है। मंदिर प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार दर्शन, पूजा, भोग और आरती के समय में बदलाव किया गया है। इसके साथ ही गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
नई व्यवस्था के अनुसार मंदिर प्रतिदिन सुबह तीन बजे खुलेगा। श्रद्धालुओं के लिए सुबह 5:30 बजे से पूजा एवं दर्शन प्रारंभ होंगे। दोपहर 12:30 बजे गर्भगृह बंद कर दिया जाएगा और दोपहर एक बजे तक माता को भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 1:30 बजे से पुनः दर्शन शुरू होंगे।
शाम छह बजे आरती के लिए गर्भगृह का द्वार बंद रहेगा। आरती के बाद शाम 7:30 बजे से फिर पूजा एवं दर्शन शुरू होंगे। रात 10 बजे मंदिर परिसर के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गर्भगृह में मोबाइल फोन ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश से पहले अपना मोबाइल निर्धारित स्थान पर जमा करना होगा। गर्भगृह में शृंगार पूजा की अनुमति नहीं होगी तथा पूजा के दौरान ढाक (ड्रम) बजाने वाले क्षेत्र में श्रद्धालुओं का प्रवेश भी प्रतिबंधित रहेगा।
इसके अलावा, माता को भोग अर्पित होने से पहले मंदिर परिसर में भोग ग्रहण करने तथा मंदिर के बाहर भोग ले जाने की अनुमति नहीं होगी। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सामान्य लाइन, वीआईपी लाइन और प्रोटोकॉल लाइन के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।
तारामाता सेवायत संघ ने सभी श्रद्धालुओं से नई नियमावली का पालन करने की अपील की है, ताकि मंदिर में दर्शन और पूजा की व्यवस्था शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा