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नई दिल्ली, 19 जुलाई (हि.स.)। निर्मोही अखाड़ा ने अयोध्या के श्री राम मंदिर के प्रबंधन का काम देखने वाली श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन करने की मांग करते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। निर्मोही अखाड़ा की याचिका में ट्रस्ट बोर्ड की ओर से संपत्ति के हस्तांतरण और वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक जांच की मांग की गई है।
ये याचिका हाल में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दान की कथित चोरी की घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद दायर की गई है। निर्मोही अखाड़ा की याचिका में मांग की गई है कि मंदिर में स्थापित नई मूर्ति की जगह पहले से मौजूद 1950 और 1982 की मूर्तियों को फिर से स्थापित किया जाए। ये याचिका उस याचिका के संदर्भ में दाखिल की गई है, जिस पर पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने फैसला सुनाया था।
निर्मोही अखाड़ा ने याचिका में कहा है कि राम मंदिर पर उच्चतम न्यायालय के 2019 के फैसले का अक्षरश: पालन नहीं किया गया। एक निजी ट्रस्ट का गठन किया गया और कुछ नामित सदस्यों ने और कुछ पदेन सदस्यों के साथ एक निजी ट्रस्ट का गठन किया गया था। इन्हीं में से कुछ लोगों द्वारा भगवान की संपत्ति में हेराफेरी की गई हो सकती है।
उच्चतम न्यायालय ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व में एसआईटी से जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए 13 जुलाई को ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने एसआईटी के गठन से जुड़े रिकॉर्ड तलब किया था। इस मामले की 20 जुलाई को सुनवाई होनी है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय---------------
हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह