सनातन परंपरा में यज्ञ निस्वार्थ बलिदान और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साझा जिम्मेदारी का प्रतीक : उपराज्यपाल
बारामुला, 19 जुलाई (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा रविवार को महायज्ञ धर्म सम्मेलन में शामिल हुए। उपराज्यपाल इस सम्मेलन को सनातन परंपरा में यज्ञ निस्वार्थ बलिदान और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साझा जिम्मेदारी का प्रतीक बताया। यह सम
सनातन परंपरा में यज्ञ निस्वार्थ बलिदान और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साझा जिम्मेदारी का प्रतीक : उपराज्यपाल


बारामुला, 19 जुलाई (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा रविवार को महायज्ञ धर्म सम्मेलन में शामिल हुए। उपराज्यपाल इस सम्मेलन को सनातन परंपरा में यज्ञ निस्वार्थ बलिदान और वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साझा जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।

यह सम्मेलन इस क्षेत्र के लिए एक आध्यात्मिक पुनर्जन्म का प्रतीक है। यह बारामूला से जम्मू कश्मीर और पूरे देश में सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश भेजता है। कई शताब्दियों तक बारामूला संस्कृति का प्रवेश द्वार, विचारों का संगम और आध्यात्मिक ज्ञान का एक महान केंद्र रहा है।

उन्होंने कहा कि आज के महायज्ञ धर्म सम्मेलन के माध्यम से हम बारामूला की अपनी गौरवशाली विरासत को पुनर्जीवित कर रहे हैं।

इस भूमि पर सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, महायज्ञ हमारी आध्यात्मिक विरासत में नई जान फूंक रहा है, जिसने जम्मू कश्मीर को विश्व में एक विशिष्ट और अनूठी पहचान दी है। हमारे पूर्वजों, ऋषियों और संतों ने प्रार्थना की थी, “लोकः समस्तः सुखिनो भवन्तु” - सभी प्राणी सर्वत्र सुखी और स्वस्थ रहें। हमारे ऋषियों का दृष्टिकोण हमेशा समावेशी और करुणामय रहा है और आज जब विश्व विभाजन और संघर्ष से जूझ रहा है, तो बारामूला की इस पवित्र भूमि से उठने वाली प्रार्थनाएँ और वेदों और भगवद गीता के श्लोक मानवता को शांति, सद्भावना और सहअस्तित्व का एक सशक्त संदेश प्रदान करते हैं।

उपराज्यपाल ने यह भी कहा कि हमारी महान परंपरा हमें प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर को देखने की शिक्षा देती है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी आध्यात्मिक परंपरा की भावना भाषा, क्षेत्र, जाति और रीति-रिवाजों के भेदों को मिटा देती है और भारत एक ऐसा प्रतीक है, जहां सभी धर्म फले-फूले हैं।

यह महायज्ञ धर्म सम्मेलन उस राष्ट्रीय एकता की जीवंत अभिव्यक्ति है और यही भारत की सच्ची पहचान है। तेजी से बदलते विश्व और जीवन के नए स्वरूप में हमें भाईचारे की परंपरा को मजबूत करना चाहिए और युवा पीढ़ी में धैर्य, करुणा, संवेदनशीलता और निस्वार्थ प्रेम जैसे गुणों का विकास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते विश्व में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए नैतिक शक्ति आवश्यक है। मेरी यह इच्छा है कि भारत के युवा नेतृत्व करें। विश्व के लिए। उन्हें नवाचार करना होगा, विचारों का मार्गदर्शन करना होगा और करुणा के साथ प्रगति का एक नया अध्याय लिखना होगा। मैं चाहता हूं कि हमारे युवा भारत की महान सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाएं और दुनिया को दिखाएं कि आधुनिकता और आध्यात्मिकता साथ-साथ चल सकती है।

इस अवसर पर पद्मश्री बृज लाल भट, संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव बृज मोहन शर्मा, उत्तरी कश्मीर रेंज के डीआईजी डॉ. विनोद कुमार, बारामूला के उपायुक्त सैयद फखरुद्दीन हामिद, बारामूला के एसएसपी गुरिंदरपाल सिंह, बारामूला के महर्षि कश्यप कॉलोनी के अध्यक्ष शिवानंद रोहित रैना, वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक समाज के सदस्य, धार्मिक नेता, प्रमुख नागरिक और बड़ी संख्या में आम लोग उपस्थित थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह