कलकत्ता हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के आमतला कार्यालय पर ध्वस्तीकरण पर लगाई रोक, यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
कोलकाता, 19 जुलाई (हि. स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रविवार को विशेष अवकाशकालीन सुनवाई में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर संसदीय कार्यालय वाले आमतला स्थित भवन पर चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान पर तत्काल रोक लगा दी। न्यायालय ने अगली
कलकत्ता हाई कोर्ट


कोलकाता, 19 जुलाई (हि. स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रविवार को विशेष अवकाशकालीन सुनवाई में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर संसदीय कार्यालय वाले आमतला स्थित भवन पर चल रहे ध्वस्तीकरण अभियान पर तत्काल रोक लगा दी। न्यायालय ने अगली सुनवाई या अगले आदेश तक सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने यह अंतरिम आदेश लीप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में दक्षिण 24 परगना के अमतला स्थित संपत्ति पर की जा रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और अवैध बताया गया है।

मामले की तात्कालिकता को देखते हुए रविवार को विशेष रूप से इसकी सुनवाई की गई। लीप्स एंड बाउंड्स तथा अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) की ओर से शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया गया था। चूंकि संबंधित भवन से तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय भी संचालित होता है, इसलिए पार्टी को भी मामले में औपचारिक प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता तथा तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान किशोर दत्ता ने दलील दी कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई वैधानिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए की गई। उन्होंने कहा कि नोटिस दिए जाने के बाद याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का कोई अवसर नहीं दिया गया और सुनवाई से पहले ही भवन को तोड़ना शुरू कर दिया गया।

उन्होंने अदालत को बताया कि संबंधित कानून के तहत किसी भी शिकायत पर पहले सुनवाई अधिकारी विचार करता है और उसकी अनुशंसा के बाद जिला परिषद के कार्यपालक अधिकारी अंतिम निर्णय लेते हैं। उनका कहना था कि संपत्ति के स्वामी को विधिवत नोटिस और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य था, जो इस मामले में नहीं दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि ध्वस्तीकरण शुरू होने से पहले न तो कोई अंतिम आदेश और न ही शिकायत की प्रति उन्हें उपलब्ध कराई गई। दत्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मौजूदगी में भवन को तोड़ा जा रहा है और अंदर रखा सामान भी नष्ट किया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने टिप्पणी की कि आवश्यक अभिलेख उसके समक्ष उपलब्ध नहीं हैं और इस संबंध में राज्य सरकार से जवाब मांगा जाएगा।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने ध्वस्तीकरण की पूरी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने तथा अगली सुनवाई या अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई राज्य सरकार का जवाब दाखिल होने के बाद होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय