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कोंडागांव, 13 जुलाई (हि.स.)। जिले में जंगली मशरूम (फूटू) खाने से फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया है। कोंडागांव की शांति (22) और रीना (17) फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गईं। यह एक सप्ताह के भीतर दूसरी घटना है।
फूटू खाने के बाद बीती देर रात दोनों चचेरी बहनों की तबियत अचानक बिगड़ गई। उन्हें उल्टी, घबराहट और फूड पॉइजनिंग के अन्य लक्षण दिखाई दिए। तत्काल उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। समय पर इलाज मिलने से फिलहाल दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। जिले में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। बारिश के मौसम में बड़ी संख्या में लोग जंगलों से फूटू और बोड़ा जैसे खाद्य पदार्थ एकत्र कर भोजन में उपयोग करते हैं। हालांकि पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।
डॉ.आरके. वर्मा ने लोगों को सलाह दी है कि फूटू या जंगल से मिलने वाले बोड़ा को सीधे पकाकर या बिना उबाले कभी नहीं खाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले इसे अच्छी तरह गर्म पानी में उबालें, उसके बाद ही भोजन में उपयोग करें। उन्हाेंने बताया कि जंगलों में इन खाद्य पदार्थों के ऊपर से सांप, बिच्छू, कीड़े-मकोड़े सहित कई विषैले जीव-जंतु गुजरते हैं। इनके विषैले तत्व सतह पर रह सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। गर्म पानी में अच्छी तरह उबालने से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगल से लाए गए फूटू या बोड़ा का सेवन पूरी सावधानी के साथ करें। यदि सेवन के बाद उल्टी, दस्त, चक्कर, पेट दर्द या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे