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अंबिकापुर, 07 जून (हि.स.)। सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र की जीवनदायिनी कही जाने वाली मांड नदी आज अपने अस्तित्व की आखिरी सांसें गिन रही है। सालों से चल रहे अंधाधुंध और अवैध रेत खनन ने इस सदानीरा नदी को एक बदसूरत मरुस्थल में तब्दील कर दिया है। क्षेत्र में सक्रिय रसूखदार बालू माफियाओं ने चंद रुपयों की खनक के लिए नदी और सहायक नालों का इस कदर बेरहमी से दोहन किया है कि इनका मूल भौगोलिक स्वरूप ही नष्ट हो चुका है। रेत की इस खुली तस्करी ने मांड नदी के जलस्तर को पाताल में धकेल दिया है, जिससे नदी पूरी तरह सूख चुकी है।
आज आलम यह है कि गर्मियों के मौसम में ग्रामीणों को अपने निस्तार और मवेशियों को प्यास बुझाने के लिए बूंद-बूंद पानी को दर-दर भटकना पड़ रहा है। नदी के सीने पर भारी मशीनें उतारकर चौबीसों घंटे किए गए अवैध उत्खनन के कारण जगह-जगह गहरे और जानलेवा तालाबनुमा गड्ढे बन गए हैं, जो आगामी मानसून के दौरान किसी भी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं। स्थानीय जनता में इस तबाही को लेकर भारी आक्रोश है, लेकिन सबसे हैरान और विचलित करने वाली बात यह है कि इस पूरे विनाश पर जिम्मेदार विभागों और स्थानीय प्रशासन ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है।
इस पूरे गंभीर मामले और प्रशासनिक लापरवाही पर जब जिला खनिज अधिकारी अनिल साहू से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह एक रटा-रटाया और औपचारिक बयान देते हुए कह दिया कि वे जल्द ही टीम भेजकर मामले की जांच कराएंगे। अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया यह बताने के लिए काफी है कि मांड नदी को मिटाने में सरकारी तंत्र कितना गंभीर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह