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-संदिग्ध वकालतनामे के कारण याचिका खारिज प्रयागराज, 05 जून (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विदेशी नागरिकों अथवा विदेश में रह रहे मुवक्किलों की ओर से याचिकाएं दायर करने में निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर जोर देते हुए वकीलों को इस संबंध में जागरूक करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने निजामुद्दीन वारसी बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भेजी जाए, ताकि अधिवक्ताओं को विदेशी अथवा देश से बाहर निवास कर रहे मुवक्किलों के मामलों में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के प्रति शिक्षित किया जा सके।
मामले में याचिकाकर्ता, जो वर्तमान में अबू धाबी में रह रहा है, ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिका के समर्थन में दाखिल वकालतनामा 12 मार्च 2026 को निष्पादित दिखाया गया था, जबकि याचिकाकर्ता उस समय भारत में मौजूद नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि अधिवक्ता यह स्पष्ट नहीं कर सके कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर वास्तव में किसने किए।
प्रक्रियागत खामियों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, हालांकि याचिकाकर्ता को विधि अनुसार नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और अखंडता बनाए रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे