मध्यस्थ की नियुक्ति अवैध करार, जारी अवार्ड रद्द
प्रयागराज, 05 जून (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और एम-एस एस.एस. कंस्ट्रक्शन कम्पनी के बीच चल रहे विवाद में मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए वर्ष 2019 का मध्यस्थता अवार्ड रद्द कर दिया। उमरहट पम्
इलाहाबाद हाईकाेर्ट


प्रयागराज, 05 जून (हि.स)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और एम-एस एस.एस. कंस्ट्रक्शन कम्पनी के बीच चल रहे विवाद में मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) की नियुक्ति को अवैध करार देते हुए वर्ष 2019 का मध्यस्थता अवार्ड रद्द कर दिया।

उमरहट पम्प नहर परियोजना, द्वितीय चरण के निर्माण कार्य हेतु 26 मार्च 2011 को 57.75 करोड़ का अनुबंध हुआ था। कार्य पूर्ण न होने पर विभाग ने 3 अक्टूबर 2013 को अनुबंध रद्द कर दिया, जिसे कंपनी ने चुनौती दी और मध्यस्थता का रास्ता अपनाया। मध्यस्थ ने 10 जुलाई 2019 को कंपनी के पक्ष में 3,40,55,718 रूपये का अवार्ड दिया था।

मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने पाया कि मध्यस्थ ए.पी. अग्रवाल की नियुक्ति मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम की धारा 12(5) और सातवीं अनुसूची का उल्लंघन करती है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना लिखित सहमति के ऐसी नियुक्ति शुरू से ही शून्य मानी जाएगी।

न्यायालय ने यह भी कहा कि जिस पक्ष ने स्वयं मध्यस्थ नियुक्त किया हो, वह भी इस आधार पर आपत्ति उठा सकता है। और यह आपत्ति किसी भी स्तर पर उठाई जा सकती है।

न्यायालय ने दोनों पक्षों को विधि के अनुसार नई मध्यस्थता कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दी है। मेरठ की वाणिज्यिक अदालत का 5 अक्टूबर 2024 का आदेश भी निरस्त कर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे