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रांची, 24 जून (हि.स.)। धनबाद रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मुआवजा भुगतान में कथित अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के घोटाले से जुड़े मामले में 18 आरोपितों की जमानत याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय में बुधवार को सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जून निर्धारित करते हुए राज्य सरकार से विभिन्न बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह एवं अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। वहीं राज्य सरकार की ओर से मामले में स्पष्ट जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर अदालत ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और अगली तिथि तक विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
मामले में विशाल कुमार सहित कुल 18 आरोपितों ने जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। जमानत याचिका दायर करने वालों में सुशील प्रसाद, विशाल कुमार, अशोक कुमार महथा, कुमारी रत्नाकर, दिलीप गोप, बापी राय चौधरी, सुमेश्वर शर्मा, शंकर प्रसाद दुबे, अनिल कुमार, नीलम सिन्हा, हर्ष कुमार, उमेश महतो, उदय कांत पाठक, राम कृपाल गोस्वामी, रविंद्र कुमार, आलोक बरियार, काली प्रसाद सिंह और अनुपम कुमारी शामिल हैं।
मामला धनबाद रिंग रोड परियोजना के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, अधिग्रहित भूमि के वास्तविक रैयतों को मुआवजा देने के बजाय कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अन्य व्यक्तियों को करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में भू-माफियाओं, तत्कालीन अंचल अधिकारियों तथा कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत रही।
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी कागजातों और रिकॉर्ड में हेरफेर कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। इसी आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में नौ जनवरी को आरोपितों की गिरफ्तारी की गई थी। वर्तमान में मामले की धनबाद जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा की जा रही है। एसीबी कथित वित्तीय अनियमितताओं, दस्तावेजों की सत्यता तथा मुआवजा वितरण प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही है।
अब मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी, जिसमें राज्य सरकार को अदालत द्वारा पूछे गए प्रश्नों पर अपना पक्ष और विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना है। इसके बाद अदालत आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर आगे विचार करेगी।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे