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सिलीगुड़ी, 21 जून (हि. स.)। सिलीगुड़ी नगर निगम में इन दिनों राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक तरफ लगातार इस्तीफों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी ओर नए बोर्ड के गठन की कोशिशों ने शहर की राजनीति को गरमा दिया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है, जिससे मेयर पद को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
पूर्व मेयर गौतम देव के इस्तीफे के बाद उनके डिप्टी रहे रंजन सरकार मेयर बनने की दौड़ में सक्रिय हो गए है। उन्होंने कुछ पार्षदों के साथ बैठक कर खुद को मेयर और संजय पाठक को डिप्टी मेयर बनाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया है। हालांकि इस बैठक में कई पार्षदों को नहीं बुलाए जाने का आरोप लगा है, जिससे पार्टी के अंदर मतभेद और गहरा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर मेयर चुनाव के लिए मतदान की स्थिति बनती है, तो पार्टी व्हिप से बचने के लिए कुछ पार्षद पहले ही इस्तीफा दे रहे है। गौतम देव के करीबी माने जाने वाले कई पार्षदों ने पद छोड़ दिया है। इनमें शिविका मित्तल, दिलीप वर्मन और अभया बसु शामिल है, जबकि कमल अग्रवाल ने भी जल्द इस्तीफा देने की घोषणा की है। इसके अलावा मानिक दे और राजेश प्रसाद शाह ने मेयर परिषद पद से इस्तीफा दिया है। हालांकि नियमों के अनुसार मेयर के इस्तीफे के साथ ही मेयर परिषद स्वतः भंग हो जाती है, इसलिए इन इस्तीफों को औपचारिक रूप से महत्वहीन माना जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
पार्टी के स्थानीय नेताओं का मानना है कि रंजन सरकार को मेयर बनाए जाने का वे विरोध करेंगे। मामला राज्य नेतृत्व तक पहुंचा दिया गया है और उचित समय पर कदम उठाने की बात कही जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही, तो राज्य सरकार सिलीगुड़ी नगर निगम में प्रशासक नियुक्त कर सकती है। वहीं, पूर्व मेयर गौतम देव भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस विवाद से दूरी बनाने की बात कही है।
हिन्दुस्थान समाचार / सचिन कुमार