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रायगढ़, 11 जून (हि.स.)।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली केलो नदी आज अपने अस्तित्व की आखिरी लड़ाई लड़ रही है। हर साल नदी की सतही सफाई और करोड़ों रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है।
इस गंभीर प्रदूषण पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए उच्च न्यायालय ने सीधे प्रदेश के मुख्य सचिव से कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है। अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल छोटे दुकानदारों पर जुर्माना लगाने का दिखावा बंद कर, प्रशासन को सिंगल यूज प्लास्टिक के असली मैन्युफैक्चरर्स और बड़े सप्लायर्स के रूट नेटवर्क को ध्वस्त करना होगा।
शहर के अनियोजित ड्रेनेज सिस्टम के कारण रोजाना टनों घरेलू कचरा और गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है। पर्यावरणविदों का मानना है कि जब तक प्रदूषण के मूल स्रोत पर प्रहार नहीं होगा, तब तक केलो को स्वच्छ रखना नामुमकिन है। अब गेंद पूरी तरह शासन और जिला प्रशासन के पाले में है।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान