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जयपुर, 11 जून (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी के तौर पर कार्यरत रहे कर्मचारी को दिए गए वेतनमान और ग्रेड पे परिलाम की वसूली करने पर प्रमुख पंचायती राज सचिव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कोटा और पेंशन निदेशक सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश प्रेम प्रकाश नागर की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता को कोटा जिले की सुल्तानपुरा पंचायत समिति में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर रहते हुए पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ देते हुए 3600 रुपए ग्रेड पे दी गई थी। वहीं कुछ सालों बाद नवंबर 2020 में आदेश जारी कर इसे घटाकर 2400 रुपए कर दी गई। याचिका में कहा गया कि मार्च, 20021 में राज्य सरकार ने इस अवधि में अधिक दिए गए करीब चार लाख रुपए की रिकवरी निकाल दी। वहीं जब याचिकाकर्ता ने राशि जमा नहीं कराई तो अक्टूबर 2021 में याचिकाकर्ता के रिटायर होने पर उसकी पेंशन व अन्य परिलाभ रोक लिए गए। याचिका में कहा गया कि पंचायती राज विभाग के साल 2016 के परिपत्र के अनुसार यदि चयनित वेतमान गलत भी दिया गया है तो अधिक राशि की वसूली कर्मचारी से नहीं की जा सकती। इसके अलावा रिकवरी आदेश जारी करने से पूर्व याचिकाकर्ता को न तो नोटिस दिया गया और ना ही उसे सुनवाई का मौका मिला। इसके अलावा याचिकाकर्ता की ओर से कोई गलत तथ्य पेश कर अधिक वेतन नहीं लिया गया है। ऐसे में उससे वसूली नहीं की जा सकती। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक