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जगदलपुर, 11 जून (हि.स.)। बस्तर जिला मुख्यालय में शासकीय संगीत महाविद्यालय की स्थापना की गई है। महाविद्यालय में 4 वर्षीय बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (BPA) पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। जिसके लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। महाविद्यालय का संचालन फिलहाल शासकीय दंतेश्वरी पीजी महिला महाविद्यालय, जगदलपुर परिसर से किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आयु की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है। 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कोई भी अभ्यर्थी इसमें प्रवेश ले सकता है। पाठ्यक्रम की वार्षिक फीस करीब 1700 रुपए रखी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को भी संगीत शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। संगीत और प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए बेहतर अवसर है।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने आज गुरूवार काे महाविद्यालय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से मुलाकात कर उनकी रुचियों और अपेक्षाओं के बारे में जानकारी ली। साथ ही महाविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं का अवलोकन किया। उन्होंने संगीत शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता सुधार को लेकर आवश्यक सुझाव भी दिए।
महाविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि, महाविद्यालय के शुरू होने से बस्तर अंचल के उन विद्यार्थियों को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें संगीत शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर ही उन्हें उच्च शिक्षा के साथ संगीत और प्रदर्शन कलाओं का प्रशिक्षण मिल सकेगा। संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक संगीत और जनजातीय कला परंपराओं को भी संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। आने वाले समय में यह संस्थान स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महाविद्यालय प्रशासन ने संगीत, गायन, वादन और प्रदर्शन कलाओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, कलाकारों और संगीत साधकों से जल्द प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे