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मुंबई, 11जून ( हि.स.) । इस साल ठाणे शहर का अधिकतम तापमान 42 डिग्री तक पहुंचने से लोग गर्मी से हैरान हैं। रुक-रुक कर हो रही बारिश, बढ़ी हुई ह्यूमिडिटी और लगातार गर्मी की वजह से हीटस्ट्रोक की शिकायतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। बच्चों और सीनियर सिटिजन समेत ठाणे के लोगों को बहुत ज़्यादा हीटस्ट्रोक झेलना पड़ रहा है।
हालांकि पिछले कुछ दिनों से ठाणे में एक-दो बार बारिश हो रही है, लेकिन माहौल में गर्मी कम नहीं हुई है। उल्टा, बारिश के बाद हवा में ह्यूमिडिटी( उमस) बढ़ जाती है, इसलिए लोगों को ज़्यादा पसीना आ रहा है। अभी गर्दन, पीठ, छाती, बगल और हाथों पर लाल रैशेज, खुजली, जलन और स्किन बर्न की शिकायतें बढ़ गई हैं। यह प्रॉब्लम बच्चों और सीनियर सिटिजन में ज़्यादा देखी जा रही है। पसीने से लगातार गीले कपड़े, गर्म और ह्यूमिड माहौल और स्किन की ठीक से देखभाल न करना हीटस्ट्रोक (लू)के मुख्य कारण माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मुताबिक, हालांकि स्वेट ग्लैंड्स एक आम प्रॉब्लम है, लेकिन इन्हें नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है। खुजलाने से स्किन पर घाव हो सकते हैं और बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, शुरू से ही सही देखभाल ज़रूरी है।
पसीने की ग्रंथियों को रोकने के लिए, रोज़ाना खूब पानी पीना, छाछ, नींबू पानी, कोकम सिरप और दूसरे तरल पदार्थ पीना ज़रूरी है। हो सके तो सूती और ढीले कपड़े पहनें जिससे शरीर सांस ले सके। दिन में दो बार नहाएं और स्किन को साफ़ और सूखा रखें। बहुत टाइट कपड़े पहनने से बचें। डॉक्टरों ने भी दोपहर में बेवजह बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। ठाणेकरों को इस समय गर्मी और उमस भरे माहौल की यह दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
ठाणे जिला सिविल सर्जन डॉ कैलाश पवार का कहना है कि अभी बढ़ी हुई नमी की वजह से पसीने की ग्रंथियों, डिहाइड्रेशन और स्किन इन्फेक्शन की शिकायतें बढ़ रही हैं। नागरिकों को खूब पानी पीना चाहिए और शरीर में पानी का बैलेंस बनाए रखना चाहिए। पसीने की ग्रंथियों से होने वाले रैश को खुजलाने से बचें और अगर समस्या बढ़ जाए तो घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा