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कोलकाता, 11 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद आंतरिक कलह और नेताओं के लगातार इस्तीफों से जूझ रही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को पार्टी के राज्यसभा सांसद बबूल सुप्रियो ने साफ कर दिया कि वह न तो किसी नए गुट में शामिल हो रहे हैं और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल का रुख करने जा रहे हैं।
बाबुल सुप्रियो ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संक्षिप्त वीडियो संदेश जारी कर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और अफवाहों के बीच वह यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वह किसी गुट या पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं।
वीडियो संदेश में सुप्रियो ने कहा कि जब कोई जहाज मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तब उसे छोड़कर जाना उचित नहीं होता।
इससे पहले बाबुल सुप्रियो की एक फेसबुक पोस्ट ने उनके संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों को हवा दे दी थी। पोस्ट में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के विभिन्न अनुभवों और भाजपा में बिताए समय का उल्लेख किया था। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे संभावित राजनीतिक विकल्प खुले रखने के संकेत के रूप में देखा था।
बाबुल सुप्रियो का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस को लगातार झटके लग रहे हैं। पिछले तीन दिनों में पार्टी के तीन राज्यसभा सांसद— सुष्मिता देव, प्रकाश चिक ब्राइक और सुखेंदु शेखर राय —पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे चुके हैं। इससे आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम की अटकलें तेज हो गई हैं।
बाबुल सुप्रियो से पहले तृणमूल के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और प्रतिमा मंडल भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जता चुके हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं और उन्हें छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।
वहीं, प्रतिमा मंडल का नाम कथित तौर पर पार्टी छोड़ने वाले सांसदों की सूची में शामिल होने की चर्चा थी। हालांकि उन्होंने इन खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह जानकारी गलत है। उन्होंने बागी खेमे को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास ऐसी कोई सूची है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।
तृणमूल कांग्रेस में जारी उथल-पुथल के बीच बाबुल सुप्रियो का खुला समर्थन पार्टी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता