आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज के एक आदेश के विरूद्ध सीजेआई के पास पहुंचा बार काउंसिल
नई दिल्ली, 06 मई (हि.स.)। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मांग की है कि वो आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक जज की ओऱ से एक युवा वकील को प्रक्रियागत कमियों के बाद 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश के मामल
सूर्यकांत


नई दिल्ली, 06 मई (हि.स.)। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मांग की है कि वो आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक जज की ओऱ से एक युवा वकील को प्रक्रियागत कमियों के बाद 24 घंटे के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश के मामले में हस्तक्षेप करें। बीसीआई चेयरपर्सन और वरिष्ठ वकील मनन मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश को औपचारिक प्रतिवेदन देकर आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस टी. राजशेखर राव के अनुचित व्यवहार पर आपत्ति जताई है।

बीसीआई ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि संबंधित जज से न्यायिक कार्य वापस लिए जाएं और उन्हें किसी दूर के उच्च न्यायालय में ट्रांसफर किया जाए। इसके अलावा संबंधित जज को जुडिशियल ट्रेनिंग के लिए भेजने की सिफारिश की जाए। बीसीआई ने कहा कि ऐसा करना न्यायपालिका की गरिमा, नैतिक अधिकार और न्यायपालिका के प्रति लोगों के विश्वास को कायम रखने के लिए जरुरी है।

बीसीआई ने मुख्य न्यायाधीश से संबंधित जज के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की, ताकि वकीलों खासकर युवा वकीलों का भरोसा कायम हो सके। बीसीआई के मुताबिक एक वीडियो सर्कुलेट हो रहा है जिसमें जस्टिस राव एक युवा वकील को इस बात के लिए डांट रहे थे कि एक आदेश विशेष की प्रति वो सुनवाई के दौरान पेश नहीं कर पाए थे। बीसीआई के पत्र में कहा गया है कि वकील की ओर से लगातार माफी मांगे जाने के बावजूद जस्टिस राव टस से मस नहीं हुए। बीसीआई के पत्र में कहा गया है कि किसी कोर्ट की गरिमा इससे नहीं बढ़ती कि कोई वकील खुली अदालत में गिड़गिड़ाए और उसे एक प्रक्रियागत कमी की वजह से जेल भेज दिया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय

----------------

हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह