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नई दिल्ली, 04 मई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय के जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले के आरोपित क्रिश्चियन मिशेल की रिहाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मिशेल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि को भी चुनौती दी है।
याचिका में मिशेल ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात से हुई प्रत्यर्पण संधि को भारतीय संसद द्वारा बनाए गए प्रत्यर्पण कानून के अधीन घोषित करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि भारतीय प्रत्यर्पण कानून की धारा 21 के तहत किसी प्रत्यर्पित व्यक्ति के खिलाफ किसी दूसरे आरोपों के मामले पर मामला नहीं चलाया जा सकता है।
इसके पहले 24 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मिशेल की ओर से भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। याचिका में कहा गया था कि संयुक्त अरब अमीरात के प्राधिकार की ओर से जारी प्रत्यर्पण आदेश का उल्लंघन कर भारतीय दंड संहिता की धारा 467 के तहत नए आरोप लगाए गए हैं। मिशेल ने कहा था कि उसके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं उसकी अधिकतम सजा वो भुगत चुका है। अधिकतम सजा के बाद भी उसे हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21, 245 और 253 का उल्लंघन है।
अगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद के मामले में 3600 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला दर्ज किया गया है। सीबीआई के मुताबिक मिशेल ने इस घोटाले की कुछ रकम 2010 के बाद हासिल की और कुछ 2010 के बाद। 3600 करोड़ रुपये के इस घोटाले में ईडी ने मिशेल को जनवरी, 2019 में गिरफ्तार किया था। मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित कर 4 दिसंबर, 2018 को भारत लाया गया था। 23 अक्टूबर, 2020 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दायर पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। चार्जशीट में 13 को आरोपित बनाया गया है। 19 सितंबर, 2020 को सीबीआई ने पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में क्रिश्चियन मिशेल, राजीव सक्सेना, अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल के डायरेक्टर जी सापोनारो और वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी के रिश्तेदार संदीप त्यागी समेत 13 को आरोपित बनाया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह