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राजगढ़, 31 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा समीपस्थ ग्राम बाल्यापुरा में 30 मई से 5 जून तक आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान का रसपान किया।
दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित कथा में कथावाचक पंडित द्वारका जी महाराज ने भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। कथावाचक ने पांडव वंश के अंतिम सम्राट राजा परीक्षित के जन्म, उनके राज्याभिषेक और जीवन के अंतिम समय में शुकदेव मुनि के आगमन की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि शुकदेव मुनि ने राजा परीक्षित को भागवत कथा के माध्यम से धर्म, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग बताया था। आज भी भागवत कथा मानव जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। कथा के दौरान भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि संसार क्षणभंगुर है और ईश्वर की भक्ति ही जीवन का वास्तविक आधार है। कलयुग में हरिनाम संकीर्तन और भागवत कथा श्रवण को मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताया गया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संतों के सान्निध्य में रहकर सत्संग करने और धर्ममय जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
पंडित द्वारका जी महाराज ने सृष्टि रचना का प्रसंग सुनाते हुए भगवान विष्णु की नाभि से प्रकट कमल, ब्रह्माजी की उत्पत्ति और सृष्टि निर्माण की कथा का वर्णन किया। साथ ही भक्ति महारानी तथा उनके पुत्र ज्ञान और वैराग्य की कथा सुनाकर बताया कि भागवत श्रवण से जीवन में आध्यात्मिक जागृति आती है। कथा में गोकर्ण और धुंधकारी के प्रसंग का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और भगवान की शरण से बड़े से बड़ा पापी भी कल्याण का मार्ग प्राप्त कर सकता है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक