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नूंह, 31 मई (हि.स.)। नूंह जिले के पुनहाना उपमंडल के गांव बिछौर और नीमका से होकर गुजर रही ब्रज 84 कोस परिक्रमा यात्रा के दौरान सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और आपसी प्रेम की प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिल रही है। यात्रा के दौरान जहां हिंदू समाज के लोग श्रद्धालुओं की सेवा और सहयोग में जुटे हुए हैं, वहीं मुस्लिम समाज भी बढ़-चढ़कर श्रद्धालुओं के स्वागत और सत्कार में भागीदारी निभा रहा है।
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए गांवों में रात्रि विश्राम की विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मुस्लिम परिवारों के घरों में ठहर रहे हैं, जहां उन्हें पानी, स्नान, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ग्रामीण श्रद्धालुओं को अतिथि मानकर उनका सम्मान कर रहे हैं और पूरी आत्मीयता के साथ उनकी सेवा में लगे हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इंसानियत, प्रेम और भाईचारा ही सबसे बड़ा धर्म है। उनके अनुसार यात्रा में आने वाले श्रद्धालु उनके मेहमान हैं और उनकी सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यही कारण है कि दोनों गांवों में धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना देखने को मिल रही है।
गौरतलब है कि नीमका और बिछौर गांव ब्रज क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और यहां से प्रत्येक तीन वर्ष बाद ब्रज 84 कोस परिक्रमा यात्रा गुजरती है। इस ऐतिहासिक और धार्मिक यात्रा का स्थानीय लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं तथा श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियां पहले से ही शुरू कर देते हैं।
यात्रा के दौरान गांवों में गंगा-जमुनी तहज़ीब की सुंदर मिसाल देखने को मिल रही है, जो समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव का संदेश दे रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे अवसर समाज को जोड़ने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का काम करते हैं। ब्रज 84 कोस परिक्रमा यात्रा के दौरान बिछौर और नीमका गांवों में देखने को मिला यह भाईचारा और सौहार्द आज के समय में समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है, जो यह बताता है कि प्रेम, सम्मान और इंसानियत किसी भी धर्म और जाति से ऊपर हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मोहानिया