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हरिद्वार, 31 मई (हि.स.)। जनपद हरिद्वार में ठोस अपशिष्ट (सॉलिड वेस्ट) के वैज्ञानिक एवं प्रभावी निस्तारण की दृष्टि से जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने जिला पंचायत राज अधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारियों और परियोजना प्रबंधक स्वजल को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नोडल अधिकारी स्वच्छता चन्द्रकांत मणि त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में बढ़ते ठोस अपशिष्ट की समस्या के समाधान और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित सभी कार्य निर्धारित नियमों के अनुरूप किए जाएं और उनकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य विकास अधिकारी द्वारा जारी पत्र में जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही प्रत्येक सप्ताह की प्रगति रिपोर्ट फोटोग्राफ सहित जिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। इसके अतिरिक्त जनपद की सभी ग्राम पंचायतों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी विस्तृत कार्ययोजना तत्काल तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
खंड विकास अधिकारियों को उनके-अपने विकास खंडों में नोडल अधिकारी नामित करते हुए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं परियोजना प्रबंधक स्वजल एवं नोडल अधिकारी स्वच्छता को सभी विकास खंडों के साथ समन्वय स्थापित कर सूचनाओं का संकलन करने तथा साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट प्राप्त कर प्रत्येक सोमवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली जनसुनवाई बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य सुधार और स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला