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नई दिल्ली, 31 मई (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में हुए तकनीकी परिवर्तन ने साल 2047 के विकसित भारत की मजबूत नींव रख दी है। इस अवधि में भारत तकनीक का अनुसरण करने वाले देश से आगे बढ़कर तकनीक का नेतृत्व करने वाला देश बन गया है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नीति निर्माण के केंद्र में रखा गया है। इससे न केवल नवाचार को बढ़ावा मिला है बल्कि अनुसंधान और विकास को भी नई गति मिली है।
उन्होंने कहा कि आज भारत अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, क्वांटम तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। ये सभी क्षेत्र मिलकर भारत के तकनीकी भविष्य को आकार दे रहे हैं और साल 2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की भागीदारी के बाद भारत का स्पेस इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या कुछ से बढ़कर 400 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि क्वांटम मिशन के तहत भारत ने लगभग 2,000 किलोमीटर की क्वांटम संचार क्षमता के लक्ष्य में से आधा कार्य शुरुआती वर्षों में ही हासिल कर लिया है। यह देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शासन, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। भारत एआई मिशन के माध्यम से भविष्य की डिजिटल तकनीकों में नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहा बल्कि नवाचार का वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है। स्टार्टअप्स, पेटेंट और वैज्ञानिक शोध में लगातार वृद्धि देश की नई पहचान को मजबूत कर रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर