Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जयपुर, 29 मई (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने शक्ति से बाहर जाकर अलवर कलेक्टर की ओर से सहायक विकास अधिकारी की वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने पर पंचायती राज विभाग और कार्मिक विभाग सहित अन्य से जवाब तलब किया है। जस्टिस अनिल कुमार उपमन की एकलपीठ ने यह आदेश देवेन्द्र कुमार की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता वर्तमान में सहायक विकास अधिकारी के पद पर कार्य कर रहा है। मई, 2017 में उसे विकास अधिकारी पद का चार्ज दिया गया था। इस दौरान कुछ काम अधूरे रहने और एमआईएस पोर्टल पर कार्यो के अपलोड नहीं होने पर याचिकाकर्ता को अलवर कलेक्टर ने 17 सीसीए के तहत चार्जशीट दी। जिसका जवाब याचिकाकर्ता की ओर से देकर कहा गया कि कार्य पूरा होने के बाद तकनीकी कारण से उसे पोर्टल पर अपलोड नहीं किया जा सका। इसके बावजूद कलेक्टर ने 30 जनवरी, 2018 को याचिकाकर्ता की एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का दंड किया। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि कलेक्टर को नियमानुसार सिर्फ असंचयी प्रभाव से वेतन वृद्धि रोकने का अधिकार है। कानून में कलेक्टर को केवन माइनर पेनल्टी लगाने का अधिकार है, जबकि असंचयी वेतन वृद्धि रोकने का दंड मेजर पेनल्टी में आता है। राज्य सरकार की ओर से अक्टूबर, 2017 में भी इस संबंध में परिपत्र जारी किया गया है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पारीक