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नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। नीट पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब तक लोगों को जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, तब तक नीट के आयोजन को प्रभावित करने वाली समस्याएं बनी रहेंगी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा मंत्रालय से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में आमूल-चूल बदलाव के लिए विस्तृत योजना मांगी है।
कोर्ट ने कहा कि असली समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक असली जवाबदेही तय नहीं हो जाती है। जब तक आप उन लोगों की पहचान नहीं कर लेते जिन पर ये जिम्मेदारी है तब तक यह एक अस्पष्ट जिम्मेदारी ही बनी रहेगी। इस मामले में एनटीए ने अपना जवाब दाखिल कर कहा है कि उसने बड़े पैमाने पर सुरक्षा सुधार किए हैं। उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामा के जरिये एनटीए ने कहा है कि उच्च स्तरीय संचालन समिति ने 17 अप्रैल को नीट की तैयारियों की समीक्षा की थी। परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परीक्षा के बाद के लिए सुरक्षा उपायों की सिफारिश की थी। इनमें अनिवार्य सीसीटीवी जांच और फुटेज को कम से कम 90 दिन तक संरक्षित रखने, परीक्षा केंद्रों पर मॉक ड्रिल, मौसम आधारित आपातकालीन योजना, पावर बैकअप सिस्टम, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और परीक्षा से एक सप्ताह पहले केंद्रों का विस्तृत निरीक्षण शामिल था।
एनटीए ने कोर्ट को बताया कि विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय कमेटी की कई सिफारिशों को पहले ही लागू कर दिया गया है या वे लागू करने के चरण में हैं। एनटीए के पुनर्गठन के लिए 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए गए हैं जिनमें निदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर के पद शामिल हैं। मार्य में एक सचिव स्तर के अधिकारी को एनटीए के महानिदेशक के रुप में भी नियुक्त किया गया था।
इसके पहले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और एनटीए को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने कहा था कि एनटीए ने पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं किया था। याचिका फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के अलावा आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉक्टर ध्रुव और हरिशरण देवगन ने दायर किया है। याचिका नीट परीक्षा में सुधार और पारदर्शिता को लेकर दाखिल की गई है। याचिका में मेडिकल प्रवेश परीक्षा को पूरे तरीके से बदलने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एनटीए को हटाकर एक नई अथॉरिटी का गठन कया जाना चाहिए जिसकी वैधानिक जवाबदेही और न्यायिक निगरानी हो।
याचिका में मांग की गई है कि 21 जून को नीट की होने वाली परीक्षा पेन और पेपर की बजाय कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) हो। याचिका में कहा गया है कि पूरी परीक्षा को सीबीटी में बदलने के लिए समयबद्ध योजना बनायी जानी चाहिए। इसमें साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों का बुनियादी ढांचा और अभ्यर्थियों की पहुंच का पूरा ब्यौरा शामिल हो। याचिकाओं में नीट 2026 के आयोजन में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के प्रणालीगत विफलता को चुनौती दी गई है। एफएआईएमए ने मामले की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा कराने और इसकी जांच उच्चतम न्यायालय के पूर्व जज की अध्यक्षता में कराने की मांग की गई है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी